शहर की सफाई व्यवस्था चरमराई, जनता कांग्रेस से पूछ रही-पांच साल में क्या किया – शहर के वार्डों की सफाई व्यवस्था बनी चुनावी मुद्दा

चंद्रहास वैष्णव

जगदलपुर। नगर निगम चुनाव में शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था चर्चा का केंद्र बन गई है। बीते पांच वर्षों में जगदलपुर की स्च्छता रैंकिंग 23 से गिरकर 100 के करीब पहुंच गई, जिससे साफ है कि कांग्रेस की शहरी सरकार नगर निगम को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखने में पूरी तरह असफल रही। जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर, बदबूदार नालियां और कचरा निस्तारण में लापरवाही अब जनता के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। इस विफलता को लेकर चुनाव में कांग्रेस को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। नगर निगम के स्वच्छता अभियान की पोल तब खुली जब शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में कचरे के ढेर आम बात हो गई। नालों की सफाई समय पर नहीं होने के कारण गंदगी और दुर्गंध ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया। कचरा निस्तारण के लिए कोई निश्चित स्थल तय नहीं किया गया, जिससे कचरा अस्थायी डंपिंग ग्राउंडों में जमा होता रहा और बीमारियों का खतरा बढ़ गया।

स्वच्छता में कांग्रेस की बड़ी विफलता
नगर निगम चुनाव को लेकर विपक्ष ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा ने कहा कि पांच साल पहले जब कांग्रेस नगर निगम में आई थी, तब स्वच्छता रैंकिंग 23 थी, और अब यह 100 के करीब पहुंच चुकी है। यह साफ दर्शाता है कि कांग्रेस की सरकार ने सफाई व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया। जनता इस बार इसका जवाब वोट से देगी। भाजपा ने आरोप लगाया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत मिले फंड का सही उपयोग नहीं किया गया और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई।

नगर निगम चुनाव में कितना असर
नगर निगम चुनाव में स्वच्छता एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है। शहरवासी इस बार व्यवस्था की बदहाली और गंदगी से तंग आ चुके हैं, और वे अपने वोट के जरिए इसका जवाब देने की बात कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस जनता को अपनी सफाई से मना पाएगी, या फिर गंदगी के इस मुद्दे पर उसे हार का सामना करना पड़ेगा?

Express MPCG