चंद्रहास वैष्णव 
1 फरवरी 2026 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट में बीड़ी, गुटखा, सिगरेट सहित अन्य तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाने की घोषणा के बाद शहर में अवैध जमाखोरी और कालाबाजारी का खेल शुरू हो गया है। बजट पेश होने के महज दूसरे दिन से ही इसका सीधा असर जगदलपुर के बाजारों में देखने को मिल रहा है, जहां तंबाकू से बने उत्पादों के दाम अचानक 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिए गए हैं।
खास बात यह है कि बजट के बाद संशोधित कर दरों वाले नए उत्पाद अभी तक शहर के बाजार में पहुंचे भी नहीं हैं, इसके बावजूद कुछ थोक और खुदरा व्यापारियों ने पुराने स्टॉक पर ही मनमाने ढंग से कीमतें बढ़ा दी हैं। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ चिल्लर विक्रेताओं की परेशानी भी बढ़ गई है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि उन्हें ऊंचे दामों पर माल खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिसका सीधा असर उनकी बिक्री और ग्राहकों से रिश्तों पर पड़ रहा है।
इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है पड़ोसी राज्य उड़ीसा में तंबाकू उत्पादों पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध ने। उड़ीसा सरकार के इस फैसले के बाद सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण छत्तीसगढ़ का जगदलपुर कालाबाजारी का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। जानकारी के अनुसार, बड़ी मात्रा में तंबाकू उत्पाद जगदलपुर और आसपास के इलाकों से वाहनों के जरिए उड़ीसा भेजे जा रहे हैं, जहां ऊंचे दामों पर इनकी अवैध बिक्री की जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ व्यापारी इस पूरे हालात का फायदा उठाकर जानबूझकर माल छिपा रहे हैं, ताकि आगे और अधिक मुनाफा कमाया जा सके। इससे न केवल कीमतों में असामान्य वृद्धि हो रही है, बल्कि कानून-व्यवस्था और राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। न तो जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए छापेमारी की गई है और न ही कालाबाजारी को लेकर किसी प्रकार की सख्ती दिखाई गई है। प्रशासन की इस चुप्पी को लेकर आम जनता और व्यापारी वर्ग में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और खाद्य एवं वाणिज्यिक कर विभाग इस स्थिति पर कब तक संज्ञान लेता है और जमाखोरी व अवैध तस्करी पर लगाम लगाने के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल, बढ़ती कीमतों का बोझ आम उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ रहा है।

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