आशीष कुमार दुबे
नरसिंहपुर। जिले भर में अनेक यात्री बसें बिना फिटनेस के बेखौफ दौड़ रही हैं लेकिन जिम्मेदार इन बसों पर कार्रवाई करने की बजाए अपनी जांच को सिर्फ हेलमेट चेकिंग तक ही सीमित रखे हैं । वहीं आरटीओ की सक्रियता भी किसी हादसे के बाद ही होती है। बाकी दिनों में गतिविधियां शून्य ही दिखाई देती है। सामान्यतः आरटीओ हाईवे पर चल रही बसों की जांच कर कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही बसों की हालत सबसे ज्यादा खराब रहती है। बसें, फिटनेस, बीमा वगैरह का तो पता ही नहीं रहता। इसी के चलते पिछले वर्ष 2023 में राष्ट्रीय राजमार्ग पर कपूरी तिराहे के पास डाइवर्ट रूट पर अनियंत्रित होकर पलट गई थी जिसमें 37 लोग घायल हो गए थे और एक नवयुवक की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी जांच उपरांत पता चला था कि उक्त बस का बीमा परमिट और फिटनेस प्रमाण पत्र जीवित समय का नहीं है ऐसे में जांच का विषय है की बिना जरूरी आवश्यक दस्तावेजों के विना कई सालों से सड़कों पर सवारी लेकर कैसे दौड़ रही है बसें । वहीं अभी तक आरटीओ अधिकारी ने हादसे के बाद भी बसों की जांच नहीं की है ।
वहीं नरसिहपुर जिले की तमाम बस बिना परमिट, बिना फिटनेस और बिना बीमे के चल रही है नरसिंहपुर और गाडरवारा सहित ग्रामीण अंचल में पर वाली कई बसें खस्ताहाल हो चुकी है। इन बसों में क्षमता से अधिक सवारियों को बैठाया जा रहा है। जिसके कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। बिना फिटनेस के सड़कों पर दौड़ लगा रही बसों पर परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने से इनके हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। कई बसों के अंदर फर्स्ट-एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और इमरजेंसी विंडो नहीं है। परिवहन विभाग के अधिकारी किसी भी बस को परमिट तभी देते हैं जब उसके अंदर परिवहन विभाग से संबंधित जारी निर्देशों को बस संचालक पूरा करें लेकिन परिवहन विभाग के सौजन्य के चलते सड़कों पर पर दौड़ लगा रही० बसों पर परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने से इनके हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। कई बसों के अंदर फर्स्ट-एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और इमरजेंसी विंडो नहीं है। परिवहन विभाग के० अधिकारी किसी भी बस को परमिट तभी देते हैं जब उसके अंदर परिवहन विभाग से संबंधित जारी निर्देशों को बस संचालक पूरा करें लेकिन परिवहन विभाग के सौजन्य के चलते सड़कों पर सरपट दौड़ लगा रहे वाहन कब और किस समय लोगों की की जिंदगी के लिए काल बनकर सामने आए जाए यह कहना बहुत मुश्किल है। क्योंकि दुर्घटना के बाद ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिससे यह साबित हो रहा है कि जिले की सड़कों पर कुछ गाड़ियां बगैर फिटनेस प्रमाण पत्र के दौड़ लगा रही है तो कुछ गाड़ी को पुरानी और जर्जर हालत में भी विभाग की ओर से प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। दरअसल, सड़क पर चल रहे वाहनों को फिटनेस देने का काम परिवहन विभाग है। विभाग के अफसर न तो सड़क पर दौड़ लगा रही गाड़ियों की जांच करते हैं और न ही जर्जर पुराने वाहनों को फिटनेस का सर्टिफिकेट देने में सख्ती बरतता है। दरअसल, यह सब पैसों का कमाल है। इसलिए विभाग आंख० मूंदकर तमाशबीन बना रहता है।
माल भाड़े का काम भी यात्री बसों से:-
नरसिहपुर जिले भर में जहां ये बसें० सवारियों का परिवहन करती हैं। वहीं दूसरी ओर ये बसें ट्रांसपोटर्स की भी पूर्ति करती हैं। इसका पैसा कंडक्टर अलग से लेता है। बस के ऊपर क्या रखा जा रहा है, क्या नहीं इस बात की० जानकारी किसी भी यात्री को नहीं रहती। हो सकता है बस के ऊपर कोई घातक चीज रखी जा रही हो लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारियों को इन चीजों से कोई लेना देना नहीं।क्षमता से अधिक बैठाते हैं सवारियां
यात्री बसों के कंडक्टर और क्लीनर परिवहन विभाग के आदेशों पर भारी दिखाई देते हैं। परिवहन विभाग सीटों के अनुसार बस मालिक को सड़क पर बस चलाने के लिए परमिट देता है लेकिन बस चालक कर्मचारी 40 से 50 की क्षमता से अधिक सवारियां बिठाकर ले जाते हैं। इससे हादसे आशंका बनी रहती है। बसों की इमरजेंसी खिड़की पर लगी है सीट
मप्र परिवहन विभाग के आदेश के तहत प्रत्येक बस में इमरजेंसी खिड़की हो, उस खिड़की की जगह कोई सीट नहीं लगाई जाएगी। साथ ही दो दरवाजे होना जरूरी हैं, लेकिन कुछ बस संचालक इमरजेंसी खिड़की की जगह सीट शिफ्ट कराकर पैसा तो कमा रहे हैं, लेकिन आने वाले समय में बस के अंदर कोई घटना घटी तो इमरजेंसी गेट का उपयोग सवारियां कैसे करेंगी। यह बात आम यात्रियों के लिए गले की फांस बनता जा रहा है।
इन नियमों का पालन करना जरूरी
बसों का परमिट, बीमा अनिवार्य होना चाहिए:-
(01) फिटनेस प्रमाण पत्र होना अनिवार्य।
(02)बसों में आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र।
(03) बसों की रफ्तार रोकने के लिए स्पीड गवर्नर लगवाना अनिवार्य।
(04)फर्स्ट एड बाक्स, दो गेट होने चाहिए।
(05)इमरजेंसी गेट अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
(06) ओवर स्पीड व ओवर लोड में बसों का संचालन नहीं होगी।
(07) बसों के आगे व पीछे स्पष्ट अक्षरों में पंजीयन क्रमांक लिखे हों।
(08) साइड ग्लास लगने होने चाहिए।
