चंद्रहास वैष्णव 
बस्तर संभाग के लोहंडीगुड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चित्रकोट के पदरगुड़ापारा में धर्मांतरित व्यक्ति के अंतिम संस्कार को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। गांव के सार्वजनिक मुक्तिधाम में शव दफनाने की कोशिश के बाद ग्रामीणों और हिंदू संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन के साथ विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए।
ग्रामीणों और समाज प्रमुखों ने आरोप लगाया कि गांव की परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करने के उद्देश्य से मिशनरी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। माहरा समाज के चित्रकोट परगना अजय बघेल ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा कि मिशनरी समर्थित लोग पंचायत स्तर पर प्रभाव बढ़ाकर ग्रामीणों के मतांतरण का प्रयास कर रहे हैं।
वहीं बजरंग दल विभाग संयोजक सिकंदर कश्यप ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद हिंदू मुक्तिधामों में शव दफनाने का प्रयास सामाजिक तनाव पैदा करता है। उन्होंने कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी मिशनरियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
ग्रामीणों, माटी पुजारी, नाईक, सिरहा-गुनिया तथा पूर्व सरपंच रैतूराम कश्यप सहित अन्य लोगों ने कहा कि गांव की परंपराओं से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। दिनभर चले विरोध और तनाव के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद मृतक के छोटे भाई पुष्पेंद्र बघेल ने तहसीलदार को लिखित आवेदन देकर शव को नजदीकी मसीही कब्रिस्तान में दफनाने की सहमति दी।
अंततः शव को मसीही कब्रिस्तान ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया, जिसके बाद स्थिति शांत हुई।इस दौरान विहिप के विभाग सेवा प्रमुख अनिल अग्रवाल,बजरंगदल जिला संयोजक विष्णु ठाकुर,सह संयोजक योगेश रैली,पूर्व जिला संयोजक मुन्ना बजरंगी,विवेक शुक्ला,शिवा नाग,इन्द्र टेमरे,पवन नामदेव,अजय बघेल,लोकेंद्रनाथ नाग सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
