आर एस भटनागर
जगदलपुर। बस्तर के प्रतिष्ठित माने जाने वाले डिमरापाल के माता रूक्मिणी आश्रम के संविदा कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़े हुए हैं। यूं तो डिमरापाल आश्रम और इसके अध्यक्ष धर्मपाल सेनी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है, लेकिन संविदा कर्मचारियों की स्थिति ये है कि यहां पूरी तरह से उनका शोषण हो रहा है। बताया जाता है कि माता रूक्मिणी सेवा संस्था के अधीन संभागभर में चल रहे आश्रमों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को करीब 4 महीनों से ज्यादा समय से वेतन नहीं मिला है।
आलम ये है कि दीपावली का त्योहार भी इन संविदा कर्मचारियों का फीका रहा। कई बार संविदा कर्मचारियों ने वेतन जारी करने की मांग अध्यक्ष से लेकर आश्रम संचालक से की, लेकिन उन्होंने इस पर कोई भी कार्यवाही ही नहीं की। लिहाजा दीपावली का त्योहार बीत जाने के बावजूद उनके खाते में वेतन जारी नहीं किया जा सका है।
बस्तर संभाग के माता रूक्मिणी सेवा संस्था के आश्रमों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि हर बार वेतन में अनियमितता बनी रहती है। नियमित वेतन की मांग कई बार की जा चुकी है, लेकिन सालों से यही अव्यवस्था बनी हुई है। ऐसे में संविदा कर्मचारियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इधर आश्रम के अध्यक्ष धर्मपाल सेनी से लेकर सचिव और संचालक तक इस अव्यवस्था को दूर करने को लेकर कोई भी पहल नहीं कर रहे हैं। ऐसे में संविदा कर्मचारियों ने सीधे तौर पर संस्था के पदाधिकारियों पर शोषण करने का आरोप लगाया है। 4-4 महीनों से वेतन नहीं मिलने से जहां संविदा कर्मचारी कर्ज के तले दबते चले जा रहे हैं, वहीं दिन-रात काम में जुटे कर्मचारियों को वेतन जारी करने की जहमत भी संस्था के पदाधिकारी नहीं उठा रहे हैं।
मालूम हो कि आश्रम के पदाधिकारी लगातार संविदा कर्मचारियों की अनदेखी कर रहे हैं। ऐसे में उनके साथ लगातार यही स्थिति बनी हुई है कि महीनों तक उन्हें बिना वेतन के काम करना पड़ रहा है। इस मामले में जब संस्था के अध्यक्ष धर्मपाल सेनी से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।
