नगरी
*अभिनव अवस्थी*
शासकीय सुखराम नागे महाविद्यालय नगरी से एक नए अध्याय का शुरूआत किया गया। जिसमें चाय-कॉफी उपन्यास का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री अजय मंडावी जी (काष्ठ कलाकार,कांकेर), अध्यक्षता आर. आर. मेहरा जी (प्रभारी, प्राचार्य महाविद्यालय नगरी) अति विशिष्ट अतिथि डॉ. शैल चंद्रा जी (साहित्यकार) विशेष अतिथि.प्रकाश चंद राय जी (प्राचार्य, डाइट नगरी) अतिथि के रूप में उपस्थित जोहन नेताम जी, भूषण लाल नाग जी, डॉ.अंबा शुक्ला जी तथा मंच संचालन प्रदीप जैन’बंटी’ जी के उपस्थिति में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
बता दें कि भानुप्रताप का नाम सिहावा क्षेत्र के साथ साथ पूरे धमतरी जिला के सबसे कम उम्र के प्रकाशित लेखकों में शामिल हो गया है। उन्होंने अपने क्षेत्र में पहले उपन्यास लिख कर पहले उपन्यासकार के रूप में भी पहचान बना ली है। इनके साथ ही माइक्रो आर्ट के क्षेत्र में एक अलग नाम बना चुके हैं । उनका नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल हो गया है। भानुप्रताप के शिक्षक बी.एल.नाग ने बताया कि भानु को माध्यमिक कक्षा से ही लेखन में रुचि थी। उसे लिखने के लिए प्रोत्साहित किया गया जिसका परिणाम चाय-कॉफी के रूप में हमें मिला। भानु प्रताप के साहित्यिक गुरु, प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.शैल चंद्रा ने बताया कि भानु ने पहली बार उन्हें खत के माध्यम से संपर्क किया था और उन्हें अपना प्रेरणा स्रोत मानकर लेखन को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई थी। चंद्रा आगे कहते हैं गुरु गुड ही रह गई, मेरा शिष्य शक्कर हो गया। मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि वह 25 वर्षों की साहित्य साधना में उपन्यास लिखने की हिम्मत नहीं जुटा पाई वह भानु ने उपन्यास लिखकर उनका सर ऊंचा कर दिया। आगे प्रकाश राय जी ने श्रद्धा पर कविता पाठ करके सबको प्रेरित किया, साथ ही जोहन नेताम ने बेरोजगारी पर काव्य पाठ करके चिंतन करने के लिए विवश कर दिया। बता दें कि जोहन नेताम चाय-कॉफी के पहले पाठक हैं, जिन्होंने उपन्यास की पहली प्रति खरीदी। पद्मश्री अजय मंडावी
ने अपने अनुभव साझा करते हुए उपस्थित सभी दर्शकों को मोहित कर गए। सभी अतिथि और दर्शक उनके सादगी और सरलता को देखकर नतमस्तक थे। उन्होंने बताया कि कलम में बहुत ताकत होती है, आपकी कलम किसी कि जिन्दगी बना सकती है तो किसी की बर्बाद कर सकती है। अध्यक्षता कर रहे आर. आर. मेहरा जी ने भानु के कॉलेज जीवन पर प्रकाश डालते हुए अपने अनुभव साझा किये।
अंत में भानुप्रताप ने अपने संघर्ष की कहानी साझा करते हुए चाय-कॉफी के बारे में बताया। काम किसी भी फील्ड में करो लेकिन सबसे अलग करो, ऐसा काम करो कि उस क्षेत्र में किसी न नहीं किया हो यहीं सोच कर मैंने उपन्यास पर काम किया और आप सबके बीच यह उपन्यास है। यह गांधी चौक में रहने वाले लड़कों की कहानी है जो छोटे-छोटे गांव से निकलकर जाते हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी के दौरान आने वाले चुनौतियों का सामना करते युवाओं को हौसला देने वाली किताब है। पुस्तक विमोचन समारोह को सफल बनाने में उपस्थित अतिथियों, मंच संचालक, शिक्षक तथा दोस्तों का आभार व्यक्त करते हुए अपनी बात रखी।
इस कार्यक्रम में भानुप्रताप के दोस्त योगेश मरकाम (ऑल इंडिया साइकिल राइडर) ललित गौर,आकाश कनौजे, विकास शांडिल्य, अर्जुन नेताम, प्रताप मरकाम, कोशिश निर्मलकर, राकेश नेताम, सुशील राजपूत, दीपेश निषाद, दिव्या भारती, भोमेश, आरती, डॉली, ललिता, अर्चना, प्रियंका, पेमिन तथा कॉलेज के विद्यार्थीगण उपस्थित थे।
