
यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर
कांकेर। जिला उत्तर बस्तर कांकेर की लोकप्रिय संस्था “जन सहयोग” द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक शानदार रैली का आयोजन किया गया, जिसकी शुरुआत कांकेर के एक छोर पर स्थित घड़ी चौक से लेकर शहर के मुख्य मार्ग का भ्रमण करते हुए पुराने बस स्टैंड में समापन कार्यक्रम किया गया । रैली में अच्छी संख्या में नागरिकों तथा बच्चों ने भी सहयोग दिया। इस अवसर पर नृत्य ,गीत, गायन ,वादन सहित पर्यावरण जागरूकता का संदेश दिया गया। पैम्फलेट वितरित किए गए एवं पुराने बस स्टैंड में समापन के समय भारत माता की जय के नारे के साथ संक्षिप्त वक्तव्य भी दिए गए।
“जन सहयोग ” के अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी ने अपने सारगर्भित भाषण में कहा कि आज पर्यावरण रक्षा की जितनी अधिक ज़रूरत है ,उतनी पहले कभी नहीं थी क्योंकि पहले जलवायु परिवर्तन का संकट ऐसा नहीं था जैसा अब हो चला है। सुबह 8:00 बजे ही 12:00 बजे जैसी गर्मी पड़ने लगी है । मौसम में भी बहुत परिवर्तन आ गया है। पेयजल की कमी होती जा रही है अतः नागरिकों का कर्तव्य है कि प्रतिवर्ष कम से कम एक वृक्ष तो अवश्य लगाएं । वृक्षारोपण ही पर्यावरण के सुधार का पहला कार्यक्रम होना चाहिए। हमें अपनी नदी तथा अपने शहर को भी स्वच्छ रखना होगा, जिसके लिए जन सहयोग द्वारा बार-बार अपील की जाती है। इस अवसर पर पर्यावरण प्रबोध के संचालक श्री मोहन सेनापति, सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ,बीरबल गढ़पाले आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मलाजकुडूम पदयात्रा तथा रैली में भाग लेने वाले सदस्यों में अध्यक्ष अजय पप्पू मोटवानी, राजेश चौहान, प्रवीण गुप्ता, उत्तम मिश्रा, सदा साहू ,कृष्णा चौरसिया, विजेंद्र पटेल, प्रतीक पटेल, पप्पू साहू ,करण नेताम, नवीन यादव, निखिल यादव, राज ठाकुर ,प्रतीक ,अयान खान, ऋषभ यादव, शैलेंद्र देहारी ,मोहन सेनापति, धीरज ठाकुर, दिनेश मोटवानी ,भूपेंद्र यादव, संजय मोटवानी तथा संत कुमार रजक इनके अलावा सुरेश चंद्र श्रीवास्तव, रामशरण जैन, सुनील साहू, मोहन सेनापति, बल्लूराम यादव, चूड़ी वाले भैया, रवि शंकर कचलाम ,नरेंद्र सोनी, बीरबल गढ़पाले, सिमरन नेताम, तरुण यादव, रूपेश जैन ,बृजेश नेताम, राजू मरकाम, प्राची नेताम, रवि मंडावी तथा कुमारी रानू गुप्ता के नाम उल्लेखनीय हैं। कुल मिलाकर “जन सहयोग” द्वारा प्रस्तुत आज का पर्यावरण दिवस का सफल कार्यक्रम वर्षों तक याद रखा जाएगा। जन सहयोग के अध्यक्ष के अनुसार हम लोग इस प्रकार के पर्यावरण संबंधी कार्यक्रम निकट भविष्य में भी करते रहेंगे जिनमें दूध नदी की रक्षा ,पदयात्रा, साइकिल यात्रा, लेखन, प्रकाशन इत्यादि अनेक पर्यावरण संबंधी प्रस्तुतियां होंगी।
