विनोद जैन 
बालोद – नगर पालिका परिषद बालोद की सामान्य सभा की बैठक इस बार बेहद तल्ख और हंगामेदार माहौल में संपन्न हुई। एजेंडा तैयार करने में विभागीय समितियों और भारसाधक सभापतियों को पूरी तरह नजरअंदाज (बाईपास) किए जाने के मुद्दे पर सदन में जमकर बवाल हुआ। स्थिति तब और असहज हो गई जब विपक्ष के साथ-साथ सत्तापक्ष के ही वरिष्ठ पार्षदों और एल्डरमैनों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बैठक में तीखी नोक-झोंक, विधिक अधिकारों के अतिक्रमण, अवैध कॉलोनियों में बिना अनुमति निर्माण, भवन अनुज्ञा के नाम पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप और प्लेसमेंट एजेंसी से जुड़े घपलों पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को लेकर सदन में घंटों गहमागहमी बनी रही।
समितियों को दरकिनार करने पर भड़के दीपक लोढ़ा व नितेश वर्मा:
बैठक की शुरुआत में ही सत्तापक्ष के पार्षद दीपक लोढ़ा एवं एल्डरमैन नितेश वर्मा ने एजेंडे को लेकर तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यसूची में शामिल अधिकांश महत्वपूर्ण विकास व वित्तीय प्रस्ताव संबंधित विभागीय समितियों और भारसाधक सभापतियों को पूरी तरह बाईपास कर सीधे सामान्य सभा में रख दिए गए हैं। यह लोकतांत्रिक और विधिक प्रक्रिया का खुला उल्लंघन है।
पीठासीन अधिकारी की भूमिका पर अध्यक्ष से सीधी भिड़ंत:
समितियों को बाईपास करने के विरोध पर नगर पालिका अध्यक्ष ने ऐतराज जताते हुए कहा कि अध्यक्ष होने के नाते क्या उन्हें सीएमओ से कोई काम कराने का अधिकार नहीं है? महिला होने के नाते उन्हें दबाने का प्रयास किया जा रहा है। अध्यक्ष के इस बयान के बाद सदन में जोरदार हंगामा खड़ा हो गया। पार्षद दीपक लोढ़ा एवं एल्डरमैन नितेश वर्मा ने सख्त लहजे में कहा कि सदन की बैठक में अध्यक्ष पीठासीन अधिकारी की भूमिका में होता हैं। सदन में बोलने और सवाल उठाने का पहला अधिकार निर्वाचित व नामांकित सदस्यों का है।
अवैध कॉलोनी में बिना अनुमति सीसी सड़क-नाली निर्माण पर पार्षद गिरिजेश गुप्ता का कड़ा विरोध:
सदन में महादेव भवन के पीछे अवैध प्लाटिंग और अवैध निर्माण का मुद्दा प्रमुखता से गूंजा। सत्तापक्ष के पार्षद गिरिजेश गुप्ता (वार्ड क्रमांक 18) ने नगर पालिका प्रशासन को घेरते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि महादेव भवन के पीछे स्थित अवैध कॉलोनी में पालिका की पूर्व अनुमति के बिना ही धड़ल्ले से सीसी सड़क और नाली का निर्माण कराया जा रहा है। इसके साथ ही वहां भवन विकास शुल्क निर्धारण के प्रस्ताव पर भी नियमों की अनदेखी की जा रही है। पार्षद गुप्ता ने बिना वैधानिक स्वीकृति के हो रहे इस निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने और अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
भवन अनुज्ञा में 50 हजार का रेट, दलाली का सनसनीखेज खुलासा:
महादेव भवन के पीछे अवैध कॉलोनी का मामला तब और गर्मा गया जब एल्डरमैन नितेश वर्मा ने सदन के पटल पर सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि नगर में भवन अनुज्ञा दिलाने के नाम पर 50,000 की खुली वसूली चल रही है। उन्होंने खुलासा किया कि महादेव भवन के पीछे अवैध कालोनी में एक जमीन दलाल ने कुछ लोगों से भवन अनुज्ञा पास कराने के लिए 50 हजार की मांग की है और यह दावा किया है कि 50 हजार देते ही अनुज्ञा मिल जाएगी। इस खुलासे के बाद सदस्यों ने निकाय के टाउन प्लानिंग व राजस्व अमले की मिलीभगत पर कड़े सवाल खड़े किए।
नेता प्रतिपक्ष का वार, विकास शुल्क का हिसाब दें, फिर बढ़ाएं दरें:
कार्यसूची के विषय क्रमांक 9 (भवन विकास शुल्क निर्धारण) पर नेता प्रतिपक्ष कशीमुद्दीन कुरैशी ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि निकाय नई दरें थोपने या वर्तमान दरों में परिवर्तन का प्रस्ताव तो ले आया, लेकिन पिछले वर्षों में नगर की जनता से भवन निर्माण अनुज्ञा के माध्यम से जो लाखों रुपये का विकास शुल्क वसूला गया है, उसका वास्तविक हिसाब सदन के सामने नहीं रखा गया। जनता के पैसे का ब्योरा दिए बिना दरों में बदलाव स्वीकार्य नहीं होगा।
113.13 लाख के स्ट्रीट पोल कार्य पर विधिक अतिक्रमण का आरोप:
शासकीय बुनियादी शाला से बघमरा रेलवे क्रॉसिंग तक 113.13 लाख की लागत से खनिज संस्थान न्यास मद से स्ट्रीट पोल स्थापना के प्रस्ताव पर सदस्यों ने आपत्ति जताई। सदस्यों का कहना था कि परिषद की पूर्व विधिवत अनुमति के बिना यह प्रस्ताव आगे भेजना निर्वाचित निकाय के विधिक अधिकारों का सीधा अतिक्रमण है। वर्ष 2026-27 की न्यूनतम निविदा दरों की स्वीकृति को लेकर पार्षद दीपक लोढ़ा, गोकुल ठाकुर एवं एल्डरमैन नितेश वर्मा ने विधिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए लिखित आपत्ति दर्ज कराई।
दुकानों का आबंटन निरस्त करने के साथ 2018 से 2026 तक के अफसरों पर जांच की मांग:
नया बस स्टैंड व ट्रांसपोर्ट नगर स्थित दुकानों (विषय क्रमांक 7 व 8) की प्रीमियम राशि जमा न होने पर आबंटन निरस्त कर पुनः नीलामी के प्रस्ताव पर एल्डरमैन चंद्रशेखर (शेखर) वर्मा ने तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आबंटन निरस्त करने में सदन को आपत्ति नहीं है, लेकिन यह सिक्के का केवल एक पहलू है। वर्ष 2018 से 2026 तक जिन राजस्व अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही से वसूली नहीं हुई, उन सभी जिम्मेदार अफसरों पर तत्काल विभागीय जांच बैठाई जाए।
प्लेसमेंट एजेंसी मामले में लिपिक पर आरोप, सीएमओ ने मानी गलती:
प्लेसमेंट एजेंसी (मेसर्स शिवशक्ति रायपुर) के सेवा विस्तार व भुगतान के मुद्दे पर पालिका लिपिक जशवंत साहू ने दावा किया कि यह विस्तार पिछली परिषद ने दिया था। इस पर एल्डरमैन नितेश वर्मा ने लिपिक को घेरते हुए कहा कि प्रशासन अपनी गड़बड़ियों को छुपाने के लिए खुलेआम झूठ का सहारा ले रहा है। बढ़ते विवाद को देखते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सदन में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि प्लेसमेंट मामले में निकाय प्रशासन से गलती हुई है तथा आश्वस्त किया कि भविष्य में समस्त कार्य पूर्णतः नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किए जाएंगे।
अन्य प्रमुख मुद्दे व तीखी बहस:
डीएमएफ मद से सदर रोड में स्टॉपर लगाए जाने के प्रस्ताव पर सत्तापक्ष के दीपक लोढ़ा व नितेश वर्मा ने तीखा विरोध किया। उनका कहना था कि स्टॉपर लगने से ग्राहकों की आवाजाही रुकेगी और व्यापारियों का व्यवसाय चौपट हो जाएगा।
विपक्ष से भेदभाव पर बिफरे सतीश यादव:
अधोसंरचना निर्माण कार्यों के आवंटन में भेदभाव का आरोप लगाते हुए वार्ड 6 के पार्षद सतीश यादव ने उपाध्यक्ष कमलेश सोनी को जमकर खरी-खोटी सुनाई।
मिनट्स बुक में दर्ज कराने को लेकर रार:
बैठक के दौरान जब सीएमओ ने कहा कि एल्डरमैनों का मंतव्य मिनट्स बुक में दर्ज नहीं होगा, तो एल्डरमैन नितेश वर्मा ने कड़ा ऐतराज जताते हुए सीएमओ के इस बयान को ही कार्यवाही पंजी में दर्ज करने की मांग की।
नवनियुक्त एल्डरमैनों का स्वागत, स्वच्छता निरीक्षक पूर्णानंद आर्य का सम्मान:
नगर पालिका के इतिहास में यह पहली ऐसी सामान्य सभा रही जिसमें कार्यसूची के विषयों से संबंधित विभिन्न विभागों के प्रभारी अधिकारी-कर्मचारी भी सदन में उपस्थित रहे। बैठक की शुरुआत में नवनियुक्त एल्डरमैनों एवं हाल ही में नगर निगम दुर्ग से स्थानांतरित होकर आए उपअभियंता का परिषद की ओर से पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। साथ ही नगरीय निकायों में कार्यरत स्वच्छता निरीक्षकों की जारी अंतिम वरिष्ठता सूची में पूरे प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाले बालोद पालिका के स्वच्छता निरीक्षक पूर्णानंद आर्य का भी परिषद द्वारा सम्मान किया गया।
पालिका प्रशासन और परिषद के बीच समन्वय का अभाव:
सामान्य सभा की इस बैठक ने यह साफ कर दिया कि नगर पालिका प्रशासन और परिषद के बीच समन्वय का भारी अभाव है। सत्तापक्ष के पार्षदों द्वारा विधिक खामियों, बिना अनुमति निर्माण व भ्रष्टाचार के आरोपों को उजागर करने और विपक्ष की आक्रामकता के चलते पूरी बैठक हंगामेदार रही।
