साय सरकार की ‘गुड बुक’ में कलेक्टर दिव्या मिश्रा! काम का ऐसा अंदाज कि बालोद में दिख रहा सुशासन का असर- फील्ड में उतरकर फैसले, योजनाओं की सीधी मॉनिटरिंग और नवाचारों से बनाई अलग पहचान-

विनोद जैन

बालोद। प्रशासनिक कामकाज में सक्रियता, योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी और जमीनी स्तर पर समस्याओं को समझकर समाधान की पहल इन खूबियों के चलते बालोद कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने जिले में अपनी अलग प्रशासनिक पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप योजनाओं को धरातल पर उतारने और प्रशासनिक व्यवस्था में कसावट लाने की उनकी कार्यशैली इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। कलेक्टर दिव्या मिश्रा की कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत उनका फील्ड फोकस माना जा रहा है। वे केवल कार्यालय में बैठकर समीक्षा करने के बजाय मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति देखती हैं और जरूरत के मुताबिक अधिकारियों को तत्काल दिशा-निर्देश देती हैं। पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, निर्माण कार्य और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता लगातार दिखाई देती रही है।

कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखे काम’ का मंत्र-
सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसे लेकर जिला प्रशासन की मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सुशासन तिहार, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण, स्वच्छता, साइबर जागरूकता और ग्रामीण विकास से जुड़े अभियानों में प्रशासन की सक्रिय भूमिका ने जिले में सकारात्मक माहौल बनाया है।

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में दिखी प्रशासनिक मजबूती-
हाल ही में डौंडीलोहारा में आयोजित महतारी वंदन सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी के दौरान जिला प्रशासन की तैयारियां भी सुर्खियों में रहीं। बड़े आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के साथ शासन की योजनाओं और विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सख्ती भी, संवेदनशीलता भी-
कलेक्टर की कार्यशैली में जहां लापरवाही पर सख्ती नजर आती है, वहीं आम जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता भी दिखाई देती है। गुणवत्ताहीन कार्यों पर रोक लगाने से लेकर अधिकारियों को जिम्मेदारी तय करने तक, कई मामलों में प्रशासनिक कसावट का संदेश दिया गया है।

नवाचारों ने बढ़ाया कद-
‘एक पेड़ महतारी के नाम’ जैसे जनभागीदारी वाले अभियान, साइबर जागरूकता कार्यक्रम और महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रयास कलेक्टर की नवाचार आधारित कार्यशैली को सामने लाते हैं। शासन की योजनाओं को जनभागीदारी से जोड़ने की पहल को भी प्रशासनिक स्तर पर खास महत्व दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, काम की गति, फील्ड में सक्रियता, योजनाओं की मॉनिटरिंग और नवाचारों का मेल कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की प्रशासनिक पहचान बनता जा रहा है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार की प्राथमिकताओं को बालोद में प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने वाली अफसर के तौर पर उनकी कार्यशैली को लेकर सकारात्मक चर्चा तेज है। बालोद में सुशासन की तस्वीर को मजबूत करने की दिशा में कलेक्टर दिव्या मिश्रा की सक्रिय भूमिका अब जिले की प्रशासनिक पहचान बनती दिखाई दे रही है।