डिजिटल अरेस्ट और फर्जी ट्रेडिंग फ्रॉड से रहें सतर्क, पुलिस ने बताया ‘रुको, सोचो और एक्शन लो’ का सुरक्षा फॉर्मूला

 

चंद्रहास वैष्णव

छत्तीसगढ़ पुलिस के राज्यव्यापी ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत बस्तर पुलिस की टीम ने बस्तर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज में विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यशाला में चैंबर के पदाधिकारियों, सदस्यों, रोटरी क्लब के प्रतिनिधियों सहित शहर के प्रमुख व्यापारिक एवं व्यावसायिक संस्थानों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने व्यापारिक संस्थानों की वित्तीय और डिजिटल सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कारोबार में डिजिटल लेन-देन जितना सुलभ हुआ है, उतना ही सतर्क रहने की जरूरत है। जागरूकता ही साइबर ठगी से बचने की सबसे बड़ी ढाल है। इस दौरान एसपी ने व्यापारियों के सवालों और शंकाओं का समाधान भी किया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुखनंदन राठौर ने डिजिटल ट्रांजेक्शन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर प्रकाश डाला और किसी भी सूरत में गोपनीय जानकारी साझा न करने की सलाह दी। नगर पुलिस अधीक्षक सुमितकुमार धोत्रे ने व्यापारियों को ओटीपी और केवाईसी फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी ट्रेडिंग, शेयर बाजार में भारी मुनाफे का झांसा देने वाले फ्रॉड तथा सोशल मीडिया के जरिए होने वाली ठगी के तरीकों से आगाह किया। वहीं साइबर थाना प्रभारी गौरव तिवारी ने साइबर अपराध के बदलते स्वरूपों और घटना होने पर तत्काल की जाने वाली कानूनी कार्रवाई की जानकारी साझा की। कार्यक्रम में कोतवाली प्रभारी लीलाधर राठौर सहित अन्य पुलिस अधिकारी भी उपस्थित रहे।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ पुलिस का यह सात सप्ताह का विशेष अभियान 15 अगस्त से शुरू होकर 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती तक चलेगा। पहले चरण में स्कूल-कॉलेजों में विद्यार्थियों को जागरूक किया गया था, जबकि वर्तमान चरण में बैंकों, वित्तीय संस्थानों और व्यापारिक वर्ग को लक्षित किया जा रहा है। पुलिस ने साइबर सुरक्षा का सरल मंत्र ‘रुको, सोचो और एक्शन लो’ देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी संदिग्ध कॉल या लिंक पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें, कभी भी ओटीपी, पिन, सीवीवी या पासवर्ड साझा न करें और यदि कोई धोखाधड़ी हो जाए तो तत्काल बैंक को सूचित करते हुए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।