भानुप्रतापपुर,ब्यूरो रिपोर्ट
भानुप्रतापपुर @छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) की अनिवार्यता को लेकर शिक्षक वर्ग में आक्रोश व्याप्त है। इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने 25 अगस्त को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में ‘टेट मुक्ति रैली’ निकालने का ऐलान किया है। रैली की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए 22 अगस्त को सभी जिलों में मोर्चा के घटक संगठनों की समन्वय बैठक आयोजित की गयी।
गौरतलब है कि 18 अगस्त को मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, केदार जैन और वीरेंद्र दुबे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षामंत्री के ओएसडी, शिक्षा सचिव तथा संचालक डीपीआई को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में टीईटी की अनिवार्यता समाप्त कर सेवा सुरक्षा और पदोन्नति सुनिश्चित करने, पूर्व सेवा को पेंशन में गणना करने, शिक्षकों को केंद्रीय वेतनमान देने, 13 फरवरी 2026 के भर्ती-पदोन्नति नियमों में संशोधन तथा शिक्षकों के लिए बीएड ब्रिज कोर्स कराने की मांग शामिल है।
मोर्चा के प्रदेश संयोजकों ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों की मांगों का जल्द निराकरण नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि 28 वर्ष के सेवा अनुभव के बाद भी शिक्षकों को टीईटी जैसी परीक्षा देने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है। मोर्चा ने कहा कि पूर्व से नियुक्त शिक्षकों के भर्ती और पदोन्नति नियम में टीईटी अनिवार्य नहीं था, नई प्रक्रिया से शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
*भानुप्रतापपुर से निरंकार श्रीवास्तव, अशोक ठाकुर,धर्मराज कोरेटी, पंकज बाजपेयी,राजेश शर्मा, गिरवर कुलदीप का आह्वान*
इस ऐतिहासिक आंदोलन को लेकर मोर्चा के निरंकार श्रीवास्तव, अशोक ठाकुर,पंकज बाजपेयी, धर्मराज कोरेटी, गिरवर कुलदीप,मनोज चौहान,पोषण ठाकुर,श्रीमती नीतू लटिया,श्रीमती रूपल रावड़े, श्रीमती दीप्ती पवार,राजेश शर्मा ने सभी शिक्षकों से एकजुट होकर रैली को सफल बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल कुछ शिक्षकों का नहीं, बल्कि प्रदेश के हर उस शिक्षक का है जिसकी सेवा सुरक्षा और पदोन्नति दांव पर लगी है। सभी ने कहा, “जिस शिक्षक ने दशकों सेवा दी है, उसे अब टीईटी जैसी परीक्षा की शर्त पर पदोन्नति के लिए मजबूर करना शिक्षकों के आत्मसम्मान के साथ खिलवाड़ है। हम सबको 25 अगस्त को एक मुट्ठी होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।”
उन्होंने आगे कहा कि 22 अगस्त को होने वाली समन्वय बैठक में रैली की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी। सभी घटक संगठनों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में शिक्षकों को रैली से जोड़ें और सरकार तक अपनी पीड़ा पहुंचाएं। “हमारी पांच सूत्रीय मांगें शिक्षकों के भविष्य से जुड़ी हैं। हमें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा और हम इसमें सफल होंगे,” उन्होंने कहा।
गौरतलब है कि रैली के बाद शिक्षक कलेक्टर और डीईओ को मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, शिक्षा सचिव एवं डीपीआई के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि टीईटी प्रभावित शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की गारंटी छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा की है।
