*व्यस्त जीवन में अध्यात्म का प्रकाश: 131 चौपाइयों में समाहित ‘संपूर्ण रामकथा सार’ पुस्तिका का नागपुर में भव्य विमोचन*

विनोद जैन

बालोद /​नागपुर – भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली और भौतिकता की अंधी दौड़ में मानव के पास ईश्वर वंदना, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक ग्रंथों के पठन-पाठन के लिए समय का भारी अभाव देखने को मिल रहा है। जनमानस की इसी आवश्यकता और आध्यात्मिक रुचि को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ के बालोद क्षेत्र की सुप्रसिद्ध योग साध्वी होमेश्वरी पुरी ने एक अनूठी रचना प्रस्तुत की है। उनके द्वारा रचित संक्षिप्त 131 चौपाइयों के ग्रंथ ‘संपूर्ण रामकथा सार’ का विमोचन श्री गीता मंदिर, प्रागणधाम, नागपुर के पावन परिसर में भक्तिमय वातावरण के बीच संपन्न हुआ।
​संतों के पावन कर-कमलों से हुआ लोकार्पण
​इस धार्मिक ग्रंथ का विमोचन अनंत विभूषित सद्गुरु महंत स्वामी निर्मलानंद जी महाराज के कर-कमलों द्वारा एवं कथाव्यास संत दयाराम बापू के विशेष सानिध्य में किया गया।
​स्वामी जी का संदेश: स्वामी निर्मलानंद जी महाराज ने पुस्तिका की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि यह लघु ग्रंथ आज के व्यस्त मानव जीवन में प्रभु श्री राम के आदर्शों और कथा को अल्प समय में आत्मसात करने का अत्यंत सरल और प्रभावी माध्यम सिद्ध होगा। उन्होंने इस प्रयास को विशुद्ध रूप से जन-कल्याण की भावना से प्रेरित बताया।
​विशिष्ट उपस्थिति: कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध भजन गायक उमेश तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।
​मार्गदर्शकों व सहयोगियों का जताया आभार
​रचनाकार साध्वी होमेश्वरी पुरी ने इस पुनीत कार्य में मिले मार्गदर्शन के लिए कथाव्यास संत दयाराम बापू एवं गुजरात के प्रख्यात कवि पुरुषोत्तम भाई भीरु भाई राठौड़ का आभार प्रकट किया। इसके साथ ही उन्होंने ग्रंथ की प्रकाशन व संकलनकर्ता जान्हवी साहू (राजनांदगांव) के समर्पण और सहयोग की सराहना करते हुए उनका धन्यवाद ज्ञापित किया।
​कार्यक्रम के समापन सत्र में सद्गुरु महंत स्वामी निर्मलानंद जी महाराज ने संत दयाराम बापू और साध्वी होमेश्वरी पुरी को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की मंगलकामना की।