चंद्रहास वैष्णव 
जगदलपुर (छत्तीसगढ़)।
सुकमा शहर में घरेलू विवाद के दौरान एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जिसमें एक व्यक्ति अपने ही पुत्र के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया। हमले में पीड़ित की जांघ में एक तीर धंस गया, जबकि दूसरा तीर कलाई के पास घुसकर हाथ की अत्यंत महत्वपूर्ण नस (नर्व) पर दबाव बना रहा था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि समय रहते इलाज न होने पर हाथ की स्थायी क्षति के साथ-साथ जान को भी खतरा हो सकता था।
घटना के बाद घायल को तत्काल जिला चिकित्सालय सुकमा से डिमरापाल मेडिकल कॉलेज जगदलपुर रेफर किया गया। रात्रि लगभग 2 बजे आर्थोपेडिक्स विभाग की टीम ने बिना समय गंवाए उपचार शुरू किया। सहायक प्राध्यापक, आर्थोपेडिक्स विभाग डॉ. आदित्य कौशिक ने विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीत पाल के मार्गदर्शन में अत्यंत जटिल शल्यक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
चिकित्सकीय परीक्षण में पाया गया कि मरीज हेमोडायनामिक रूप से स्थिर था, लेकिन कलाई में धंसा तीर नस पर लगातार दबाव बना रहा था, जिससे स्थायी नर्व डैमेज का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था। डॉक्टरों की तत्परता और कुशलता से तीर को सुरक्षित रूप से निकालकर नस को बचा लिया गया।
ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है। इस सफल ऑपरेशन से न केवल एक जीवन बचा, बल्कि हाथ की कार्यक्षमता को भी सुरक्षित किया जा सका। बस्तर अंचल में तीर से घायल होने जैसी घटनाओं के बीच यह ऑपरेशन आर्थोपेडिक्स विभाग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
