चंद्रहास वैष्णव 
नई दिल्ली।
सूचना के अधिकार (RTI) कानून के दुरुपयोग को लेकर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि कोई भी अधिवक्ता (वकील) अपने मुवक्किल, परिजन या स्वयं के निजी कानूनी विवादों में लाभ उठाने के उद्देश्य से RTI का इस्तेमाल नहीं कर सकता। ऐसा करना RTI अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है।
आयोग ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि RTI कानून को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है, न कि इसे किसी व्यक्तिगत या पेशेवर लड़ाई में “रणनीतिक हथियार” के रूप में प्रयोग करने के लिए।
क्या था पूरा मामला
मामला हरियाणा के एक जवाहर नवोदय विद्यालय से जुड़ा है, जहां फल और सब्जी आपूर्ति के एक ठेके को विद्यालय प्रशासन ने रद्द कर दिया था।
ठेका रद्द होने के बाद एक अधिवक्ता ने RTI के तहत विद्यालय प्रशासन से ठेका प्रक्रिया, मूल्यांकन, निर्णय से जुड़े दस्तावेज और अन्य गोपनीय जानकारियां मांगीं।
जब यह मामला केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष अपील के रूप में पहुंचा, तो सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जिस व्यक्ति का ठेका रद्द किया गया था, वह अपीलकर्ता अधिवक्ता का सगा भाई है।
आयोग की सख्त टिप्पणी
सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने इस मामले को गंभीर मानते हुए वकीलों द्वारा RTI के बढ़ते पेशेवर और निजी इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई। आयोग ने कहा कि इस प्रकार की याचिकाएं RTI कानून की आत्मा को कमजोर करती हैं।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि—
RTI जनहित के लिए है, न कि व्यक्तिगत विवादों या कानूनी रणनीति के लिए
यदि कोई वकील अपने रिश्तेदार या मुवक्किल के लिए RTI दाखिल करता है, तो यह हितों के टकराव (Conflict of Interest) की श्रेणी में आता है
इस तरह का व्यवहार पेशेवर नैतिकता और कानून दोनों के खिलाफ है
फैसले के प्रमुख बिंदु
🔹 पारदर्शिता बनाम निजी हित
RTI का उद्देश्य शासन और सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता लाना है, न कि किसी निजी लाभ को साधना।
🔹 हितों का टकराव
वकील यदि अपने मुवक्किल या रिश्तेदार के लाभ के लिए सूचना मांगते हैं, तो यह उनकी निष्पक्ष भूमिका पर सवाल खड़ा करता है।
🔹 कानून का दुरुपयोग
आयोग ने कहा कि निजी या पेशेवर स्वार्थ से दायर RTI आवेदन कानून के उद्देश्य को विकृत करते हैं।
🔹 अपील खारिज
इन सभी आधारों पर केंद्रीय सूचना आयोग ने अधिवक्ता की अपील को खारिज कर दिया।
विशेषज्ञों की राय: एक बड़ी नजीर
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि CIC का यह फैसला भविष्य में एक महत्वपूर्ण नजीर (Precedent) साबित होगा।
अक्सर देखा गया है कि चल रहे मुकदमों में विपक्षी पक्ष को दबाव में लेने या अतिरिक्त जानकारी हासिल करने के लिए RTI का सहारा लिया जाता है।
इस फैसले के बाद अब ऐसे मामलों में RTI आवेदन दाखिल करने से पहले वकीलों को सावधानी बरतनी होगी।
CIC का स्पष्ट संदेश
“RTI जनहित का एक सशक्त औजार है। इसे व्यक्तिगत लाभ या पेशेवर फायदे का जरिया बनाना लोकतंत्र की इस महत्वपूर्ण व्यवस्था को कमजोर करता है।”
— केंद्रीय सूचना आयोग
निष्कर्ष
केंद्रीय सूचना आयोग का यह फैसला साफ संकेत देता है कि सूचना का अधिकार केवल सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है।
आयोग ने वकीलों को उनकी पेशेवर मर्यादा और नैतिक जिम्मेदारियों की याद दिलाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि RTI का दुरुपयोग किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह निर्णय न सिर्फ RTI व्यवस्था को मजबूत करता है, बल्कि इसके वास्तविक उद्देश्य को भी पुनः स्थापित करता है।
