कन्या भ्रूण हत्या और लिंग चयन पर सख्ती, पीसीपीएनडीटी समिति ने की कार्रवाई की तैयारी

चंद्रहास वैष्णव

जिले में कन्या भ्रूण हत्या पर प्रभावी रोक लगाने और लिंगानुपात को संतुलित बनाए रखने के उद्देश्य से गुरुवार 15 जनवरी को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, जगदलपुर में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के अंतर्गत पुनर्गठित जिला सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत पंजीयन हेतु प्राप्त नवीन आवेदनों की गहन समीक्षा की गई। इस दौरान डिमरापाल स्थित कॉन्टिनेंटल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा हुई। समिति ने सभी आवेदनों को अधिनियम के कठोर प्रावधानों और मापदंडों की कसौटी पर परखा।

समिति के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1994 में लागू यह अधिनियम गर्भधारण से पूर्व या प्रसव पूर्व लिंग चयन एवं लिंग जांच पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में बालिकाओं के अस्तित्व की रक्षा करना और लैंगिक असंतुलन को रोकना है। बैठक में अधिनियम के सख्त और प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित निगरानी तथा उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई किए जाने का निर्णय लिया गया।

बैठक में स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी सक्रिय सहभागिता रही। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक तथा पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी डॉ. भंवर शर्मा के नेतृत्व में हुई इस बैठक में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सी. मैत्री एवं आईडीएसपी नोडल अधिकारी डॉ. वी. के. ठाकुर ने अपने तकनीकी सुझाव प्रस्तुत किए। वहीं कानूनी और सामाजिक पक्ष को सशक्त बनाने के लिए अधिवक्ता श्रीमती प्रीति वानखेडे तथा समाजसेवी श्रीमती अंजू की विशेष उपस्थिति रही।
समिति ने स्पष्ट संदेश दिया कि जिले में कन्या भ्रूण हत्या और लिंग चयन जैसी सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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