प्राथमिक शाला में दो शिक्षक पांच कक्षा कैसे पढ़ाएंगे इसी बात को लेकर गांव गांव में ग्रामीण लाम बंद हो रहे हैं व मुख्यमंत्री के नाम चिट्ठी लिख रहे हैं ग्राम डुमाली कांकेर में ग्रामीणों की बैठक संपन्न हुई व 2008 के सेट अप के अनुसार शिक्षक रखने की मांग की है

यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर

बस्तर संभाग में 660 के लगभग शिक्षक अतिशेष हो रहे हैं जिसमें से कांकेर जिले में 260 शिक्षक सबसे ज्यादा हैं वहीं बस्तर संभाग में सिर्फ सुकमा नारायणपुर जिले में सिर्फ 230 पद रिक्त हैं 230 अगर भर भी जाएंगे तो भी 430 शिक्षक अतिशेष रहेंगे मगर इन्हें कहां भेजा जाएगा? शिक्षक पद संभागीय स्तर का पद है बस्तर संभाग से इन्हे बाहर नियमानुसार नहीं भेजा जा सकता ,शासन द्वारा एक ओर खुली स्थानांतरण नीति में पति-पत्नी प्रकरण गंभीर बीमारी आदि के तहत स्थानांतरण करने की बात की है व अतिशेष की श्रेणी में ऐसे ही शिक्षक हैं जो इन्हीं प्रकरणों के तहत स्थानांतरण करा अपने निवास जिले में 2008 के सेटअप के आधार पर पोस्टिंग प्राप्त किए हैं शासन के युक्ति युक्त करण निर्देश से बस्तर संभाग के बिहड़ो में सेवा दे रहे शिक्षकों का मनोबल कम हुआ है,बस्तर संभाग में कोई नौकरी करना नहीं चाहता वही जो बस्तर संभाग के बीहड़ो में सेवा दे रहे हैं उन्हें अतिशेष किया जा रहा है छत्तीसगढ़ शिक्षक साझा मंच के प्रदेश सहसंचालक वाजिद खान हेमेंद्र साहसी जिला संचालक स्वदेश शुक्ला ने कहा कहा कि बस्तर संभाग के परिपेक्षय में शासन को पुनर्विचार करना चाहिए, बस्तर संभाग में शासन द्वारा 2600 सहायक शिक्षकों और शिक्षकों की भर्ती की गई है जिनकी पदस्थापना राज्य से ऐसे शालाओं में की गई है जहां पर पहले से पर्याप्त शिक्षक थे,जबकि उनकी पदस्थापना सरकार चाहती तो एकल शिक्षकीय शाला में ही करनी थी पर उनकी पदस्थापना कर देने से पुराने शिक्षक अतिशेष हो रहे हैं, जो स्थानीय है, गलत विसंगति पूर्ण निर्देशों के होने के कारण अतिशेष में नई भर्ती वाले शिक्षकों को शामिल नहीं किया जा रहा है जो कि कुछ वर्षों में ट्रांसफर होकर चले जाएंगे उसके बाद स्कूल शिक्षकविहीन हो जाएगा, शिक्षक साझा मंच पदाधिकारियो ने मुख्यमंत्री महोदय से मांग किया है कि सरकार बस्तर संभाग के स्थिति को देखते हुए पुनर्विचार कर 2008 के सेटअप अनुसार ही शिक्षकों को यथावत रखे कांकेर जिले के शिक्षकों द्वारा पूरे प्रदेश में अपने अध्यापन शैली से जिले का नाम रोशन किया है जिसकी वजह से प्रदेश में मेरिट की टॉप लिस्ट में 12वीं दसवीं की परीक्षाओं में बच्चे आए हैं सैनिक विद्यालय एकलव्य नवोदय राष्ट्रीय प्रतिभावान छात्रवृत्ति परीक्षा में सर्वाधिक चयनित होने में कांकेर जिले ने रिकॉर्ड बनाया है वह उनकी मेहनत का परिणाम प्रतिशत कर देने से कांकेर जिले का शिक्षा के स्तर गर्त में चला जाएगा अतः सरकार 2008 के सेटअप के अनुसार ही रखते हुए वर्तमान नीति की विसंगति को दूर करे

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