जगदलपुर में पानी संकट बना चुनावी मुद्दा, शहरवासी कांग्रेस से मांग रहे जवाब, पिछले पांच साल में कांग्रेस की शहर सरकार ने पानी की समस्या दूर करने कुछ खास नहीं किया

चंद्रहास वैष्णव

जगदलपुर। नगर निगम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा हैं, शहर की जनता बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाने लगी है। पिछले पांच वर्षों में पानी की गंभीर समस्या ने शहरवासियों की परेशानी बढ़ा दी है। कांग्रेस नेतृत्व वाली नगर सरकार के 22 पानी टैंकरों के रखरखाव में लापरवाही बरतने से वे कबाड़ हो गए, जिससे सूखा प्रभावित वार्डों में जल संकट और गहरा गया। अब, चुनाव के समय जनता कांग्रेस से जवाब मांग रही है कि आखिर इन पांच वर्षों में पानी की समस्या हल करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए? जगदलपुर शहर के कई वार्डों में पानी की आपूर्ति पहले से ही सीमित थी, लेकिन बीते पांच सालों में यह स्थिति और खराब हो गई। नगर निगम प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए 22 पानी टैंकरों का सही रखरखाव नहीं होने के कारण वे बेकार पड़े रहे। परिणामस्वरूप, गर्मी के महीनों में सूखा प्रभावित इलाकों के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते रहे। कांग्रेस सरकार न सिर्फ नगर निगम में, बल्कि प्रदेश में भी सत्ता में रही, इसके बावजूद पानी की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

भाजपा ने साधा कांग्रेस पर निशाना
नगर निगम चुनाव में यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पांच साल तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने जनता को पानी जैसी मूलभूत सुविधा तक नहीं दी। भाजपा के एक स्थानीय नेता ने कहा, “शहर में जल संकट गहराता गया और कांग्रेस सरकार आंख मूंदकर बैठी रही। नगर निगम के पानी टैंकर तक कबाड़ हो गए, लेकिन इसे सुधारने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। अब जब चुनाव आ गया है, तब कांग्रेस जनता को झूठे वादों में उलझाना चाहती है।”

चुनावों में बड़ा मुद्दा बनेगा जल संकट?
शहर के मतदाता अब विकास बनाम वादों के आधार पर मतदान करने की बात कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने कहा कि हर बार चुनाव में नेता आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद पानी जैसी बुनियादी समस्या भी हल नहीं कर पाते। इस बार हम सिर्फ वादों पर नहीं, बल्कि काम पर वोट देंगे। नगर निगम चुनाव में यह मुद्दा कितना प्रभाव डालेगा, यह तो नतीजे ही बताएंगे, लेकिन इतना तय है कि जगदलपुर में पानी की किल्लत अब सिर्फ जनता की समस्या नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का भी केंद्र बन चुकी है।

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