दीपक विश्वकर्मा
*एक्सप्रेस*==उमरिया जिले के बहु प्रसिद्ध ज्वाला धाम मंदिर में श्रद्धालुओं के आस्था का एकमात्र ऐसा केन्द्र है जहां पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु ज्वाला धाम शक्ति पीठ पहुंच कर माथा टेकते हैं , तथा अपने मनोभावों को पूर्ण करने के लिए लाखों रूपए का गुप्त दान की भेंट चढ़ा कर जाते हैं ,यह धनराशि साल के चारो नवरात्रि में कई गुना बढ़ जाती है लेकिन इस धनराशि का कोई हिसाब नहीं होता है ।
ज्वाला धाम में हों रहीं अकुत आमदनी को छिपाने और किसी अन्य को इसकी भनक न लगे इसके लिए मंदिर के पंडा -पुजारियों के बीच की खटपट प्रशासन के चौखट तक पहुंचती है , पर यहां पर ज्वाला धाम को अपनी विरासत मान चुके बड़े महराज जी की गणित के आगे खटपट को छटपट सुलझा लिया जाता है ।
ज्वाला धाम मंदिर में विराजमान बड़े महराज जी मूल रूप से ग्राम पंचायत में सचिव पद पर सुशोभित है , जिससे प्रशासन को अपने पक्ष में करने का उनका पुराना पैंतरा आज कहीं ज्यादा असर दार बनकर उभरा है । कभी किसी को ग्राम पंचायत से साधते हैं तो कहीं पर ज्वाला धाम से प्रसाद वितरित कर अपने गोरख धंधा को दिन दुगना -रात चौगुना तरक्की कर रहा है । जब उचेहरा ग्राम पंचायत में सचिव पद पर पदस्थ थे , उस दौरान इन्होने काली कमाई में गजब ढहाया । बताया जाता है कि ज्वाला धाम में हुए निर्माण कार्यों में वही कार्य के बिल ज्वाला धाम के खर्चे में जोड़ा गया है और वही कार्य ग्राम पंचायत में भी दर्ज़ है । बड़े महराज जी को यह सहूलियत मिली हुई है कि न यहां कोई देखने वाला और न ही वहां।
आश्चर्यजनक कहा जाये कि बड़े महराज जी के कारोबार को देख कर तार्जुबेकारो का मानना है कि ज्वाला धाम से बड़े महराज जी का तो ज्वाला धाम पूर्ण रूप से इनकी जागीर बनी हुई है , जहां पर एक कैंटीन के साथ तीन अन्य दुकान और एक हार्डवेयर की दुकान संचालित कर रखें है। इतना भी होता तो शायद लोग धीरज रखते पर इसके इतर यहां से प्राप्त होने वाली अंधाधुंध दान का अधिकांश हिस्सा इनके कमाई का हिस्सा बना हुआ है और उससे बड़े महराज जी की हवेली , भौतिक संसाधनों पर व्यय होते देखा जा सकता है । ज्वाला धाम मंदिर की आमदनी का अनुमान लगाने वाले अनुभव कारो का मानना है कि करोड़ों रुपयों की दान राशि जो ज्वाला धाम में आ रही है, वह जिले के अन्य मंदिरों से क ई गुना अधिक है , फिर भी ज्वाला धाम को अब तक प्रशासन अपने हिस्से में लेने के दिशा में अकर्मण्य बना हुआ है ।
