*शहर के मिनी स्टेडियम में चल रही रामकथा के पांचवे दिन की कथा सुनाते पंडित अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा पुरूष की रचना ब्रम्हा जी के दाहिने भाग से तथा महिला की रचना ब्रम्हा जी के बाएं भाग से हुई है। दाहिने भाग में दिमाग होता है जबकि बाएं भाग में दिल होता है। यही कारण है पुरूष हमेशा दिमाग से सोचता है जबकि महिलाएं दिल से सोचती हैं इसलिए ममतामयी कहीं जाती हैं। विश्व में सनातन धर्म ही एक एसा धर्म है जिसमें नारी तथा पुरूष को बराबर यानी समानता का दर्जा दिया गया है जबकि विश्व के बाकी सभी धर्मों में महिला को समानता का दर्जा नहीं है। यही सनातन धर्म की महानता है*

यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर

कांकेर। माताएं दिल से सोचती हैं इसलिए ममतामयी मानी गई हैं और यही कारण है शास्त्रों में भी बच्चों पर पिता से अधिक माता को अधिकार दिया गया है। बच्चों को मां ही पालती हैं क्योंकि माता स्वयं गीले में हो जाएगी लेकिन बच्चे को सुरक्षित सूखे स्थान पर रखती है। महिलाएं ममतामयी होती हैं यही कारण है कभी पति पत्नी में झगड़ा भी हो जाए तो एक दो घंटे बाद पत्नी भूल जाती है और बातचीत करने लगती है। वहीं पुरूष पहले तो झगड़ा करेगा नहीं और करेगा तो फिर उसे सहज होने में समय लगता है। जीवन पूर्ण तभी होता है जब पति पत्नी में सामंजस्य होता है। महिला तथा पुरूष के इस मूल स्वभाव को पति पत्नी समझ लें तो फिर घरों में जो थोड़ी बहुत क्लेश होगी वह भी समाप्त हो जाएगी। अतुलकृष्ण जी ने कहा की दुनिया में राम नाम की बड़ी महिमा है। मनुष्य आज सोशल मिडिया में घंटो समय बीता देता है लेकिन राम का नाम लेने उसके पास समय नहीं होता। इसके लिए उपाय बताते कहा की मनुष्य को मार्निंग वाक करते समय पैरों की जरूरत होती है जीभ खाली रहती है तो उस वक्त राम का नाम जपते रहना चाहिए। इसी प्रकार महिला को झाडू लगाते, आटा गूंथते, सब्जी काटते, पराठा बनाते समय राम नाम का जप करना चाहिए। इससे मन भी शांत रहेगा और काम में एकाग्रता भी बढ़ेगी। यही नहीं प्राणायाम तथा कपालभाती करते समय भी राम नाम का जप करने की विधि बताई। अतुल कृष्ण जी ने कहा भगवान राम दिन के 12 बजे तो भगवान कृष्ण रात के 12 बजे प्रकट हुए थे। भगवान राम दिन के 12 बजे प्रकट हुए इसलिए सूर्यवंशी कहलाए वहीं भगवान कृष्ण रात के 12 बजे प्रकट हुए इसलिए चंद्रवंशी कहलाए। प्रसंग सुनाते कहा भगवान राम जब 24वें त्रेता में प्रकट हुए तो चंद्रमा उदास हो गए। भगवान ने पूछा तो कहा सूर्य आपके बाल रूप के दर्शन कर रहा है जबकि मैं वंचित हो रहा हूं। तब भगवान ने उन्हें वचन दिया की 28वें द्वापर में मैं रात के 12 बजे प्रकट होकर चंद्रमा को दर्शन दूंगा। तब चंद्रमा ने फिर अपना दुख व्यक्त करते कहा इतने समय तक मुझसे इंतजार कैसे होगा? तब भगवान राम ने कहा की मैं भले ही राजा सूर्यवंशी कहलाऊंगा लेकिन मेरे नाम के साथ हमेशा तुम्हारा नाम होगा इसलिए भगवान राजा रामचंद्र कहलाए।