यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर

कांकेर। पहले दिन कथावाचक अतुल कृष्ण भारदृाज ने गुरू महिमा का वर्णन किया था। दुसरे दिन शिव पार्वती विवाह प्रसंग कथा सुनाते ऋषि अगस्त्य, यज्ञोक्लज्ञ व भारदृाज मुनि की महिमा का वर्णन किया। एसी मनोकामना करना चाहिए कि सीताराम, लखन, हनुमान के साथ हमारे मन में हमेशा बसे रहें। रामचरित मानस में गुरू तुलसीदास ने सभी की वंदना की है। रचनाकार ने सज्जनों के साथ दुष्टो भी प्रणाम किया है। जो भी उत्तरप्रदेश में प्राचीन तीर्थ हैं उनका मुख्यमंत्री योगी जी ने नाम बदल बहुत अच्छा कार्य किया है। फैजाबाद को अयोध्या, इलाहबाद को प्रयागराज नामकरण किया गया है। अब दोनो तीर्थ स्थल अपने प्राचीन नाम से जाने जा रहे हैं। पूरी दुनिया में जो चिकित्सा पध्दति है उसमे आयुर्वेद चिकित्सा पध्दति को ऋषि भारदृाज ने शुरू किया था। काशी ज्ञान की बड़ी राजधानी है। काशी में पूरे प्रदेश से लोग पढ़ने आते थे। अंग्रेजो ने साजिश कर गुरूकुल पध्दति को बंद करा दिया था। पहले संस्कृत की शिक्षा सभी जगह दी जाती थी। उपनिषद ज्ञान के सबसे बड़े भंडार हैं। सबसे अधिक ज्ञान उपनिषद में है। भगवान शिव सबसे बड़े ज्ञानी है। सिहावा से महानदी निकली है जिसका सभी को दर्शन करना चाहिए। कनार्टक में कावेरी निकली है। दोनो नदी भगवान शिव की देन है। कथा के समापन के बाद सभी श्रध्दालुओं को प्रसाद के रूप में लड्डु वितरण उदयप्रकाश शर्मा द्वारा किया गया। प 7 जनवरी को श्रीराम जन्मोत्सव प्रसंग सुनाया जाएगा। कार्यक्रम में महावीर सिंह राठौर, भरत मटियारा, नगरपालिका अध्यक्ष सरोज ठाकुर, अरूण कौशिक, राजकुमार फब्यानी, मोहन सेनापति, डा गीता शर्मा, नरेश परिहार, अविनाश नेगी, धमेंद्र सिंह ठाकुर उपस्थित थे।
