यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर

कांकेर। 5 फरवरी को रामकथा के पहले दिन दो हजार महिलाएं सिर पर कलश लेकर ऊपर नीचे रोड शिव मंदिर से निकली तो माहौल राममय हो गया था। कलश यात्रा की शोभा बस्तर का पारंपरिक मांदरी नृत्य, धुमाल पार्टी, रामदरबार की सजीव झांकी के साथ रथ पर सवार कथा वाचक अतुलकृष्ण जी बढ़ा रहे थे। रास्ते में जगह जगह श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा तथा कथा वाचक का स्वागत पुष्पवर्षा से किया।
शहर में रामकथा की तैयारियां पिछले एक महीने से चल रही थी। रामकथा आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह था। आयोजन समिती की व्यापक तैयारियों तथा घर घर निमंत्रण पहुंचाने का असर दिखा तथा महिलाएं स्वस्फूर्त कलश यात्रा में शामिल होने पहुंची। सुबह 11 बजे से लाल तथा पीली साड़ी पहनी महिलाओं का हूजूम ऊपर नीचे रोड शिव मंदिर में जमा होने लगा। दोपहर 2 बजे ऊपर नीचे रोड से कलश यात्रा बाजे गाजे के साथ निकली। कलश यात्रा में सबसे आगे बस्तर का पारंपरिक मांदरी नृत्य करते लोक कलाकार चल रहे थे। इनके पीछे शहर के गणमान्य नागरिक चल रहे थे। इसके पीछे धुमाल पार्टी फिर रामदरबार की सजीव झांकी थी। इसके बाद सिर पर कलश लिए युवतियां तथा महिलाएं कतारबद्ध चल रही थी। कलश यात्रा का स्वागत गुजराती समाज, जैन समाज, कांकेर चेंबर आफ कामर्स, सिंध समाज, सर्व ब्राहमण समाज, सखी संगनी वुमन क्लब, नगर पालिका परिषद, साहू समाज ने किया। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने कथावाचक अतुलकृष्ण जी का भी स्वागत किया। कलशयात्रा कार्यक्रम स्थल मिनी स्टेडियम पहुंची जहां कलश पूजन किया गया। राम कथा में पहले दिन भगवान गणेश, देवी सरस्वती, भगवान शिव वंदना की गई। फिर रामकथा की शुरूवात हुई। कथावाचक अतुल कृष्ण भारदृाज ने कहा 22 जनवरी को होने वाले भगवान राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होकर बहुत ही अच्छी अनुभूति हुई। उस दिन भारत ही नहीं पुरी दुनिया राममय हो गई थी। भगवान राम ने कांकेर से होकर ही वन गमन किया था। कंक ऋषि से मिलने पहुंचे थे। कांकेर की भूमि काफी पवित्र है क्योंकि यहां भगवान राम के चरण पड़े हैं। अब भारतवासी ही नहीं विदेशी भी हरे कृष्णा, हरे रामा करते हैं। 2 करोड़ अंग्रेज सनातन धर्म मानने लगे हैं। राम भक्ति पूरी दुनिया में फैल रही है। देश विश्व गुरू बनने की ओर आगे बढ़ रहा है। यदि पूरी दुनिया अपने धर्म को महत्व दे रही है तो भारत को अपने धर्म पर गर्व करना चाहिए। अगर धर्म रहेगा तो लक्ष्मी सुरक्षित रहेगी। सबसे पहले भगवान का आर्शीवाद प्राप्त करने कलश यात्रा निकालना जरूरी है। मैदान राम कथा आयोजन के लिए काफी अच्छा है क्योंकि पहाड़ के नीचे है और पहाड़ ऋषियों की तपोभूमि रही है।
