आर एस भटनागर
जगदलपुर। आधुनिक काल में जहां काव्य की अनेक विधाएं विलुप्त होती जा रही हैं। वहीं साहित्य मर्मज्ञ अभी भी छंदों की साधना में लीन होकर साहित्य की सुधीर्घ परंपरा को जीवित रखने में अपनी योगदान दे रहे हैं। उन्हीं में से एक हैं छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर ग्राम इंजरम (कोंटा) में जन्मी नवनीत कमल। वे बालपन से ही साहित्यिक गतिविधियों व सृजनात्मक लेखन में समर्पित रहीं।
हाल ही में बुक क्लिनिक प्रेस बिलासपुर से प्रकाशित “ताड़ वनों के बीच” दोहा संग्रह प्रकाशित हुआ है। नवनीत कहती हैं कि छंदबद्ध रचनाएं सदैव साहित्य को स्थायित्व प्रदान करतीं है। इसी भावना के वशीभूत छंद साधना को लक्ष्य बनाकर जीवन लेखनी और पठन पाठन को समर्पित करने वाली नवनीत कमल की यह तीसरी कृति है।
पूर्व में “स्मृतियों के मृग” 2000 नोशन प्रेस चेन्नई, “एक नदी सा मन” गीत संग्रह बुक क्लीनिक बिलासपुर छत्तीसगढ़ से प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा कई साझा संग्रह राष्ट्रीय स्तर के पत्र-पत्रिकाओं व डिजिटल प्लेटफार्म में उनकी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रही हैं। वर्तमान में वे शहर के जगतु माहरा शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में व्याख्याता पद पर कार्यरत हैं।
