सीपीआई के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने लगाया आरोप मुठभेड़ में मारे गए नक्सली ग्रामीण क्षेत्र के थे नक्सली नही थे

यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर

सीपीआई के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने लगाया आरोप मुठभेड़ में मारे गए नक्सली ग्रामीण क्षेत्र के थे नक्सली नही थे
ताड़मेटला में कथित मुठभेड़ की घटना को धौर्य के साथ तमाम पहलुओं का विश्लेषण किये। सहयोग से मैं (मनीष कुंजाम) उसी दिन ग्राम एलमागुंडा में प्रोग्राम था, दिन में 10:30 बजे करीब चिंतागुफा गांव पहुंच गया था, तब ही सुकमा एसपी साहब का फोन आया कि ताड़मेटला में मुठभेड़ चल रहा है, आपका एलमागुंडा जाना उचित नहीं रहेगा, ऐसा कहने पर मैंने अपना कार्यक्रम स्थगित किया। वहीं उपस्थित गांव के साथियों के साथ इस घटना पर चर्चा शुरू किये, कहने लगे की मुठभेड़ यदि रात में से चल रहा है तो आवाज सुनाई क्यों नहीं आ रहा है फिर एसपी साहब का इस टाइम में भी मुठभेड़ जारी है कहना और संदेह को गहरा करता है। चिंतागुफा से ताड़मेटला की दूरी 7- 8 किलोमीटर होगा। इतनी दूरी से आवाज तो आता ही। खैर हम लोग वापस हुए। पुसवाडा के पास पहुंचे होंगे, तभी ताड़मेटला के पढ़े-लिखे एक लड़के का फोन आया कि आप मिनपा , एलमागुंडा कितना समय पहुंच रहे हैं? मैंने कहा कि कार्यक्रम स्थगित करके वापस जा रहा हूं इसका कारण बताया। फोन में ही वो लड़के बताने लगे कि यहां ऐसा कोई घटना नहीं हुई है, हम लोग तो यही है,ये बात सुनने के बाद मैं आचार्य पड़ गया।इसी दिन 5 सितंबर को रात 8:9 बजे फोन कर के बताया गया कि दो लड़के तिम्मापुरम सगा गये थे, वहां से वापस आ रहे थे, उनको फोर्स ने वहीं कहीं पकड़ा होगा और मार डाला। उनके नाम सोडी कोसा व रवा देवा के रूप में सामने आया और पुलिस ने दोनों के नाम देवा देवा बताया है। यह दोनों लड़के तिम्मापुरम गये थे, रवा देवा के जीजा इनको मोटरसाइकिल देकर भेजा कि हमारे लिए मछली बीज ला देना। वहां से आ रहे थे कि बीच में कहीं पकड़ करके मार डाला गया और इसे मुठभेड़ बताया गया। रवा देवा का गांव में एक छोटा सा दुकान है, और साप्ताहिक बाजार में दुकान भी लगाता था, ऐसी जानकारी मिल रही है और दोनों मृतकों के आधार कार्ड भी हैं, इसका साफ मतलब है कि ये दोनों नक्सली नहीं थे। पुलिस दोनों को एक-एक लाख का इनामी बताया है। मुठभेड़ में मार गिराने वालो के हिसाब से यह रकम बहुत कम है । यानी मामला स्पष्ट रूप से फर्जी दिखता है।परिजन और ग्रामीणों का कहना है कि मार क्यों डालें, पकड़े थे तो जेल में ही डाल देते, कम से कम जीवित तो रहते।पुलिस व फोर्स कहती है कि हम लोगों का विश्वास जीतना चाहते हैं, और इस तरह की घटना बताती है कि ये दावा सच्चाई से कोसो दूर है।भूपेश व लखमा के राज में पुलिस व फोर्स की इस निर्दयतापूर्ण घटना को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी व आदिवासी महासभा कडी निंदा करती है और मांग करते हैं कि इस घटना की जांच कर दोषियों पर कार्यवाही किया जाये।
मनीष कुंजाम
राज्य सचिव
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी छत्तीसगढ़ ,जिला सुकमा

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