
@ यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर
कलेक्टर डॉ. प्रियंका शुक्ला के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी के मार्गदर्शन में जिले के बंधक मजदूरों को तमिलनाडु से वापस लाकर अप्राप्त मजदूरी राशि का भुगतान कराया गया। कलेक्टर डॉ. प्रियंका शुक्ला को कांकेर जिले के मूरागांव, खसगांव, अलनार के नाबालिग बच्चों को बंधक बनाने की सूचना मिलने पर पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्यवाही करते हुए तमिलनाडु राज्य के धर्मापुरी जिले के ग्राम पंचायत कोदूर में 4 नाबालिग बच्चे व 6 श्रमिकों को लाने हेतु रेस्क्यू दल का गठन किया गया। कलेक्टर के निर्देशन में जिला बाल संरक्षण इकाई महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग, श्रम विभाग एवं चाइल्ड लाइन के सदस्य की टीम तैयार कर तमिलनाडु रवाना किया गया, जहां पर लोकेशन के आधार पर इन बच्चों व श्रमिकों तक पहुंचने में सफलता मिली। धर्मापुरी के आरडीओ ऑफिसर श्रीमती टी.आर. गीता रानी के सहयोग से सभी बाल श्रमिक और श्रमिकों को स्थानीय प्रशासन की मदद से अप्राप्त मुआवजा राशि 02 लाख 16 हजार 200 रुपये भुगतान कराया गया।
गौरतलब है कि बंधक मजदूर वेंकटेश्वरा बोरवेल्स कंपनी में पिछले 3 माह से काम कर रहे थे जो घर आना चाहते थे, जिन्हें गृह जिला कांकेर वापस आने नहीं दिया जा रहा था। रेस्क्यू टीम द्वारा तमिलनाडु पहुंचकर जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बालक कल्याण समिति धर्मापुरी की सहयोग से बंधक श्रमिकों को वापस लाने में सफलता प्राप्त किये। टीम द्वारा बंधक मजदूरों को वापस लाकर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमीत अग्रवाल से मुलाकात करवाई गई। तत्पश्चात कार्यवाही करते हुए कलेक्टर डॉ. प्रियंका शुक्ला के निर्देशानुसार आयुष्मान कार्ड, श्रमिक पंजीयन एवं पुनर्वास दिलाने के लिए स्किल डेवलपमेंट के प्रशिक्षण से जोड़ने हेतु सूची तैयार की गई। रेस्क्यू टीम में थाना प्रभारी तड़ोकी श्री अजय कुमार साहू, जिला बाल संरक्षण अधिकारी रीना लारिया, श्रम निरीक्षक विवेक साव, आरक्षक कोमल नवरेती, चाइल्डलाइन टीम मेंबर महेश साहू एवं आउटरीच वर्कर श्रीमती अजीता पोया उपस्थित थे।
