मान्यता पर सवाल जमीन पर की जांच और सम्मान समारोह की तैयारी आईपीएस स्कूल पर उठे सवालों के बीच शिक्षा विभाग ने गठित की जांच टीम अब दस्तावेज बोलेंगे या सम्मान समारोह

 दीपक विश्वकर्मा

सम्मान समारोह की चमक आईपीएस स्कूल की मान्यता भूमि और बोर्ड पैटर्न पर सवाल जांच के लिए टीम गठित शिक्षा विभाग की टीम खंगालेगी दस्तावेज वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जाएगी रिपोर्ट*
जांच की आहट के बीच गरबा और पत्रकार सम्मान समारोह की तैयारी, चर्चाओं का बाजार गर्म उमरिया जिले में शिक्षा व्यवस्था का एक दिलचस्प अध्याय इन दिनों मोहनपुरी स्थित आईपीएस स्कूल को लेकर चर्चा में है मामला स्कूल की मान्यता भूमि आवंटन बोर्ड पैटर्न और जरूरी सुविधाओं से जुड़े सवालों का है शिकायतें प्रशासन तक पहुंचीं तो अब जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच के लिए टीम गठित कर दी है। ऐसे में अब स्कूल प्रबंधन के दावों से लेकर दस्तावेजों की वास्तविकता तक, हर पहलू की पड़ताल होने की उम्मीद है

सवाल उठे तो जांच शुरू अब दस्तावेजों की बारी

स्थानीय स्तर पर उठाई गई शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि स्कूल के लिए लगभग चार हजार वर्गफीट शासकीय भूमि के धारणा अधिकार का पट्टा प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में ऐसी भूमि का उल्लेख है जिसकी स्थिति और स्कूल से संबंध की जांच जरूरी है शिकायतकर्ताओं ने भूमि आवंटन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल करने की मांग की है अब देखना यह है कि सरकारी फाइलों में दर्ज जमीन और मौके पर मौजूद स्कूल की स्थिति के बीच कितना मेल निकलता है फिलहाल आरोप अपनी जगह हैं और उनका सच जांच के बाद ही सामने आएगा। आखिर कागजों की दुनिया में सब कुछ सही दिखना और धरातल पर सब कुछ सही होना, दोनों अलग-अलग बातें भी हो सकती हैं सीबीएसई का बोर्ड, एमपी बोर्ड का सवाल विद्यालय परिसर में सीबीएसई पैटर्न का बोर्ड लगाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्कूल की वास्तविक बोर्ड संबद्धता को लेकर अभिभावकों के सामने स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए उनका दावा है कि विद्यालय मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल से संचालित है ऐसे में सवाल सीधा है विद्यालय की वास्तविक संबद्धता क्या है क्या स्कूल के बाहर लगा बोर्ड और आधिकारिक दस्तावेज एक ही कहानी बताते हैं इसका जवाब स्कूल प्रबंधन के दस्तावेज और संबंधित विभाग की जांच से ही मिल सकेगा
क्योंकि शिक्षा के मंदिर में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को आकर्षक बोर्ड नहीं बल्कि मान्यता और संबद्धता की स्पष्ट जानकारी चाहिए
नाम में आईपीएस सुविधाओं पर भी हो पड़ताल विद्यालय के नाम में आईपीएस शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं इसके साथ ही खेल मैदान भवन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता की जांच की मांग की गई है अब शिक्षा विभाग की टीम के सामने चुनौती सिर्फ दस्तावेज देखने की नहीं बल्कि मौके पर उपलब्ध सुविधाओं का वास्तविक आकलन करने की भी होगी विद्यालय में क्या सुविधाएं हैं, क्या कमियां हैं और निर्धारित मानकों का कितना पालन हो रहा है इन सवालों के जवाब निरीक्षण के बाद ही मिलेंगे शिक्षा विभाग की टीम गठित अब जांच की परीक्षा शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच के लिए टीम गठित की है उपलब्ध जानकारी के अनुसार टीम में बीईओ करकेली प्रदीप सिंह गहलोत और ललन सिंह मरावी को शामिल किया गया है टीम संबंधित विद्यालय पहुंचकर दस्तावेजों और व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेगी तथा अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपेगी अब असली परीक्षा जांच टीम की भी है निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रहता है या मौके की वास्तविक स्थिति भी रिपोर्ट में दर्ज होती है यह देखना महत्वपूर्ण होगा जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है जांच की आहट के बीच गरबा और सम्मान समारोह की तैयारी*
इधर मामले की जांच की प्रक्रिया शुरू होने के बीच विद्यालय में गरबा कार्यक्रम और पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित करने की तैयारियों की चर्चा भी सामने आई है बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में जिले के अधिकारियों, समाजसेवियों और नेताओं को आमंत्रित करने की तैयारी है।
ऐसे में परिस्थितियों ने एक दिलचस्प सवाल खड़ा कर दिया है—एक तरफ विद्यालय के दस्तावेजों और मानकों की जांच होनी है, दूसरी तरफ सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान समारोह की तैयारियां चर्चा में हैं बहरहाल गरबा भारतीय संस्कृति और उत्सव का हिस्सा है तथा पत्रकारों का सम्मान करना भी अपने आप में गलत नहीं है लेकिन सम्मान समारोह की चमक और सांस्कृतिक आयोजन अपनी जगह हैं, जबकि मान्यता, भूमि और स्कूल संचालन से जुड़े सवाल अपनी जगह। दोनों को एक-दूसरे का विकल्प नहीं माना जा सकता
यदि प्रबंधन की मंशा विद्यालय कीसकारात्मक छवि सामने लाने की है तो सबसे प्रभावी तरीका पारदर्शिता स्पष्ट दस्तावेज और निर्धारित मानकों का पालन ही होगा अब फैसला समारोह नहीं जांच रिपोर्ट करेगी फिलहाल आईपीएस स्कूल से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है स्कूल प्रबंधन का पक्ष और प्रशासनिक जांच की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी अब निगाहें जांच टीम पर टिकी हैं। क्या भूमि के दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट होगी क्या बोर्ड संबद्धता और मान्यता को लेकर उठे सवालों का जवाब मिलेगा क्या खेल मैदान और अन्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति सामने आएगी इन सभी सवालों का जवाब जांच के निष्कर्षों में तलाशा जाएगा क्योंकि स्कूल की प्रतिष्ठा केवल बड़े नाम, आकर्षक बोर्ड या मंच पर होने वाले सम्मान से नहीं बनती उसकी असली पहचान विद्यार्थियों को मिलने वाली शिक्षा पारदर्शी व्यवस्था और नियमों के पालन से होती है अब देखना यह है कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है व्यवस्थाओं को क्लीन चिट, सुधार की जरूरत या फिर नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश