*पार्षद निधि के कार्यों की जमीनी हकीकत पर पर्दा क्यों? भौतिक सत्यापन कराने हाथ पांव फूल क्यों रहे हैं साहब !*

विनोद जैन

​बालोद। नगर पालिका परिषद बालोद में पार्षद निधि से कराए गए विकास कार्यों और खरीदी गई सामग्रियों में क्या सब कुछ नियमों के तहत हुआ है, या फिर कागजों और जमीन की हकीकत में कोई बड़ा फासला है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), 2005 के तहत जब एक सजग नागरिक ने केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि मौके पर जाकर कार्यों और सामग्रियों के स्थल निरीक्षण (भौतिक सत्यापन) की मांग की, तो नगर पालिका प्रशासन ने निरीक्षण की तारीख तय करने के बजाय पल्ला झाड़ते हुए गोलमोल जवाब थमा दिया।
​अगर कार्य हुआ है, तो भौतिक सत्यापन से डर कैसा?
​नगर पालिका के इस रुख ने सीधे तौर पर प्रशासनिक मंशा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं:
​आखिर क्या छुपाना चाहती है नगर पालिका? यदि पार्षद निधि की पाई-पाई जनता की भलाई और वार्डों के विकास में पारदर्शिता से खर्च हुई है, तो आवेदक और जनता के सामने उसका भौतिक सत्यापन करवाने में हिचक क्यों है?
​क्या निरीक्षण से खुल जाएगी कागजी दावों की पोल? आरोप लग रहे हैं कि क्या धरातल पर सामग्री उस गुणवत्ता और मात्रा में मौजूद ही नहीं है, जितनी कागजों पर दर्शाई गई है? क्या यही वजह है कि मौके पर जाकर जांच की अनुमति देने से बचा जा रहा है?
​स्पष्ट मांग पर गोलमोल जवाब क्यों? जब आवेदक ने लिखित रूप में तारीख, समय और अधिकृत नोडल अधिकारी तय करने का आग्रह किया था, तो पत्र में इस पूरी मांग को नजरअंदाज कर केवल फाइलों के अवलोकन तक सीमित क्यों कर दिया गया?
​20 वार्डों में पार्षद निधि की जांच के लिए प्रस्तुत हुआ था आवेदन
​वार्ड क्रमांक 07 (काशीवन तालाब के पास) निवासी आवेदक उमेश कुमार सेन ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 2(j)(i) व 2(j)(iii) के तहत वार्ड क्रमांक 01 से 20 तक वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 (अद्यतन) में पार्षद निधि से हुए कार्यों की विस्तृत जानकारी मांगी थी।
​आवेदन में स्पष्ट रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर भौतिक व दस्तावेजी जांच मांगी गई थी:
​वार्डवार सामग्री व कार्यों का स्थल निरीक्षण: वार्ड 01 से 20 में पार्षद निधि से क्रय, स्थापित अथवा संधारित सामग्रियों का भौतिक सत्यापन और आवश्यकता पड़ने पर प्रमाणित नमूने (Samples) लेने की सुविधा।
​स्वीकृति आदेश एवं मांग पत्र (Indent): सक्षम प्राधिकारी द्वारा दी गई वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति की प्रतियां।
​निविदा, कोटेशन व भुगतान देयक: क्रय आदेश (Supply Order/Work Order) और आपूर्तिकर्ता फर्मों के बिल-वाउचर की प्रतियां।
​स्टॉक पंजी व भौतिक सत्यापन अभिलेख: सामग्री की आवक, स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि और तत्कालीन भौतिक सत्यापन प्रमाण-पत्र।
​वितरण, संस्थापन व उपयोगिता प्रमाण-पत्र (UC): सामग्री किस वार्ड में कहां लगी, इसका वितरण रजिस्टर और पूर्णता प्रमाण-पत्र।
​जवाब में घुमावदार रुख: स्थल निरीक्षण की तारीख पर चुप्पी
​आवेदक ने नियमों के तहत आग्रह किया था कि निरीक्षण के लिए तारीख, समय और नोडल अधिकारी की जानकारी कम से कम 7 कार्यदिवस पूर्व लिखित में दी जाए, ताकि वे मौके पर उपस्थित रह सकें।
​किंतु, जनसूचना अधिकारी, नगर पालिका परिषद बालोद द्वारा जारी पत्र (क्रमांक 2957/सू.के.अ./2026-27, दिनांक 15/10/2026) में स्थल निरीक्षण का कोई स्पष्ट खाका खींचने के बजाय यह लिख दिया गया कि ‘चाही गई जानकारी 50 पृष्ठों से ज्यादा होने के कारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आप कार्यालय में उपस्थित होकर अवलोकन कर सकते हैं’।
​कार्यालयीन फाइलों का पन्ना पलटना एक अलग प्रक्रिया है, लेकिन ‘धरातल पर जाकर सामग्री देखना’ सूचना के अधिकार का वैधानिक हिस्सा है। ऐसे में सवाल उठता है कि नगर पालिका ने निरीक्षण कराने की तारीख निर्धारित क्यों नहीं की? क्या इस तरह का जवाब देकर मामले को केवल कार्यालय की आलमारियों तक सीमित रखने की रणनीति बनाई गई है?
​बीपीएल आवेदक पर नियमों की अनदेखी का आरोप
​आवेदक ने स्वयं को गरीबी रेखा से नीचे (BPL) श्रेणी का बताते हुए वैध राशन कार्ड की स्व-प्रमाणित प्रति संलग्न की थी और आरटीआई कानून की धारा 7(5) के परंतुक के तहत समस्त जानकारी व निरीक्षण पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराने की मांग की थी। इसके बावजूद पारदर्शिता बरतने के बजाय प्रक्रिया को उलझाए जाने से जनहित के मुद्दे पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
​जनता के पैसे का हिसाब देना नगर पालिका की जिम्मेदारी
​पार्षद निधि आम जनता के करों (टैक्स) से जुटाई गई राशि होती है, जिसका उपयोग वार्डों में स्ट्रीट लाइट, डस्टबिन, नाली निर्माण, पेवर ब्लॉक जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए किया जाता है। यदि सामान सही गुणवत्ता का खरीदा गया है, सही जगह लगा है और स्टॉक रजिस्टर दुरुस्त है, तो नगर पालिका को आगे बढ़कर भौतिक सत्यापन की तारीख घोषित करनी चाहिए।
​अब देखना यह होगा कि क्या नगर पालिका प्रशासन इन तीखे सवालों का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष स्थल निरीक्षण का कार्यक्रम घोषित करता है, या फिर यह मामला उच्च अपीलीय मंच और राज्य सूचना आयोग की चौखट तक जाएगा।