* संघ की कार्यप्रणाली पर सुलग रहा आक्रोश! किसी को महीने में 2–3 ट्रिप, तो किसी को 7–9 ट्रिप लोड मिलने का दावा गरीब ट्रक मालिकों की गाड़ियां घरों में खड़ी, रसूखदारों की ट्रकें सड़कों पर दौड़ने के आरोप — आखिर परिवहन संघ में किसे मिल रहा ज्यादा फायदा?*

भानुप्रतापपुर,ब्यूरो रिपोर्ट

परिवहन संघ की कार्यप्रणाली को लेकर संघ के सदस्यों के बीच असंतोष बढ़ने की चर्चा सामने आ रही है। सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के अनुसार, कुछ ट्रक मालिकों को पर्याप्त लोड नहीं मिलने से उनकी गाड़ियां महीनों तक खड़ी रहने की स्थिति बन रही है, वहीं कुछ अन्य ट्रक मालिकों को अपेक्षाकृत अधिक ट्रिप मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

बताया जा रहा है कि परिवहन संघ से जुड़े कुछ ट्रक मालिकों को एक महीने में महज 2 से 3 ट्रिप ही लोडिंग मिल पा रहा है, जबकि कुछ अन्य पदाधिकारी को 7 से 9 ट्रिप तक मिलने की चर्चा है। यदि यह स्थिति सही है, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि आखिर लोड आवंटन की व्यवस्था किस आधार पर संचालित हो रही है?

गरीब ट्रक मालिकों की गाड़ियां खड़ी, खर्च का बोझ बरकरार

ट्रक खरीदने के लिए कई छोटे वाहन मालिकों ने कर्ज लिया है। उन्हें बैंक की किस्त, वाहन का बीमा, रखरखाव और अन्य खर्चों का भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में यदि उनकी गाड़ियों को नियमित रूप से लोड नहीं मिलता किसी किसी सदस्यों की ट्रकें कागजी जांच के नाम पर बोर्ड से बहार तक करने की बाते समय समय पर सुनने को मिलता रहा है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, अधिक ट्रिप मिलने वाले ट्रक मालिकों को लगातार काम मिलने से उनकी कमाई की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में संघ के भीतर समान अवसर और पारदर्शी लोड वितरण की मांग उठना स्वाभाविक है।

लोड वितरण में पारदर्शिता पर सवाल

सूत्रों के अनुसार, संघ के कुछ सदस्यों में मौजूदा कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी है। सवाल यह है कि क्या सभी ट्रक मालिकों को समान अवसर मिल रहा है? लोड आवंटन के लिए कोई निर्धारित नियम है या नहीं? यदि नियम हैं, तो उनका पालन किस तरह किया जा रहा है?

इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है, ताकि छोटे ट्रक मालिकों की शिकायतों और आशंकाओं का समाधान हो सके।

आखिर परिवहन संघ में फायदा किसे मिल रहा है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कुछ ट्रक मालिकों को महीने में केवल 2 से 3 ट्रिप मिलने की बात कही जा रही है, तो कुछ को 7 से 9 ट्रिप कैसे मिल रहे हैं? क्या इसके पीछे कोई स्पष्ट व्यवस्था है, या लोड आवंटन में असमानता की शिकायतों की जांच होगी ?

फिलहाल इन सवालों पर संघ की ओर से आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए लोड आवंटन का रिकॉर्ड, ट्रक मालिकों को मिली ट्रिप का विवरण और संघ के निर्धारित नियमों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

अब निगाहें परिवहन संघ के जिम्मेदार पदाधिकारियों पर हैं। क्या संघ इस असंतोष पर स्पष्टीकरण देगा और लोड वितरण की व्यवस्था सार्वजनिक करेगा? या छोटे ट्रक मालिकों की परेशानी यूं ही बनी रहेगी?

यह मामला केवल ट्रिप की संख्या का नहीं, बल्कि पारदर्शिता, समान अवसर और छोटे ट्रक मालिकों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।

बरहाल सदस्यों ने परिवहन संध के अध्यक्ष के समक्ष अपनी लिखित शिकायत पेश की है ।जिसे लेकर अध्यक्ष ने इस मामले मे जाँच समिति गठन कर जांच करने की बात कही अब देखने वाली बात होगी कि संघ के पदाधिकारी के ऊपर नियमानुसार क्या कार्यवाही होती है फिरहाल जिन गाड़ी मालिक की शिकायत मिली है उनकी ट्रकें बोर्ड से बहार करने की बातें भी सामने आ रही है।