*पंद्रहवें वित्त की राशि में बंदरबांट का आरोप, पार्षद किरण बाला छाबड़िया ने नगर पालिका अधिकारी को घेरा* कुछ विपक्षी पार्षदों को भारी-भरकम राशि, तो कुछ सत्ता पक्ष के पार्षद भी कार्यों से वंचित—आवंटन प्रक्रिया पर उठे सवाल

तिल्दा,नेवरा

गोवर्धन यदु

तिल्दा-नेवरा@ नगर पालिका तिल्दा-नेवरा में पंद्रहवें वित्त आयोग की राशि के आवंटन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नगर पालिका की पार्षद श्रीमती किरण बाला छाबड़िया ने नगर पालिका अधिकारी पर पंद्रहवें वित्त की राशि के आवंटन में गंभीर अनियमितता और पक्षपात के आरोप लगाए हैं।

पार्षद का आरोप है कि पंद्रहवें वित्त की राशि से विकास कार्यों का आवंटन सभी वार्डों की आवश्यकता के आधार पर करने के बजाय कथित तौर पर राजनीतिक समीकरणों और व्यक्तिगत नजदीकियों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। उनका कहना है कि कुछ सत्ता पक्ष से जुड़े पार्षदों के वार्डों को प्राथमिकता दी गई, जबकि कई विपक्षी पार्षदों के वार्डों में पर्याप्त विकास कार्य नहीं दिए गए।

*कुछ विपक्षी पार्षदों को भी भारी-भरकम राशि देने का आरोप*

किरण बाला छाबड़िया ने यह भी आरोप लगाया कि सभी विपक्षी पार्षदों को विकास कार्यों से वंचित नहीं रखा गया है। कुछ विपक्षी पार्षदों को भी भारी-भरकम राशि के कार्य आवंटित किए गए हैं, क्योंकि उनके अनुसार वे पार्षद नगर पालिका अधिकारी के साथ मिलकर कार्य करते हैं।

पार्षद का आरोप है कि इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या कार्यों का आवंटन केवल राजनीतिक दल के आधार पर हो रहा है या फिर व्यक्तिगत समीकरणों और नजदीकियों की भी इसमें भूमिका है।

*सत्ता पक्ष के कुछ पार्षद भी राशि से वंचित*

वहीं, पार्षद ने यह भी कहा कि कुछ सत्ता पक्ष के पार्षदों के वार्डों में भी पंद्रहवें वित्त की राशि से कार्य आवंटित नहीं किए गए हैं। ऐसे में मामला केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भेदभाव का नहीं रह जाता, बल्कि पूरे आवंटन की प्रक्रिया और उसके आधार पर सवाल खड़े होते हैं।

यदि सत्ता पक्ष के कुछ पार्षदों को भी राशि नहीं मिली और दूसरी ओर कुछ विपक्षी पार्षदों को भारी राशि के कार्य दिए गए, तो यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि आखिर कार्यों के चयन की वास्तविक कसौटी क्या रही। क्या वार्ड की आवश्यकता, प्रस्ताव, तकनीकी स्वीकृति और प्राथमिकता के आधार पर राशि दी गई या फिर अन्य कारकों ने भी भूमिका निभाई—यह नगर पालिका प्रशासन के स्पष्टीकरण से ही स्पष्ट होगा।

*वार्डवासियों को विकास के लिए तरसने का आरोप*

किरण बाला छाबड़िया का कहना है कि नगर पालिका के प्रत्येक वार्ड की जनता को समान रूप से विकास का अधिकार है। सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों का चयन राजनीतिक विचारधारा या व्यक्तिगत समीकरणों के आधार पर नहीं होना चाहिए।

उनका आरोप है कि कई वार्डों के नागरिक लंबे समय से विकास कार्यों की मांग कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त राशि और कार्य नहीं मिलने के कारण उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

*पंद्रहवें वित्त की राशि का वार्डवार हिसाब सार्वजनिक करने की मांग*

पार्षद ने मांग की है कि पंद्रहवें वित्त आयोग की राशि से स्वीकृत एवं प्रस्तावित सभी कार्यों की वार्डवार सूची, स्वीकृत राशि, कार्य की प्रकृति और कार्य चयन का आधार सार्वजनिक किया जाए।

उनका कहना है कि यदि पूरी जानकारी सार्वजनिक कर दी जाती है तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस वार्ड को कितनी राशि मिली, किन वार्डों को कार्य नहीं मिले और किन आधारों पर कार्यों की प्राथमिकता तय की गई।

*आरोपों पर अधिकारी का पक्ष*

पंद्रहवें वित्त की राशि को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद अब नगर पालिका अधिकारी का कहना है कि जो वार्ड छूट गया है उसको दूसरे मद से कार्य दिया जाएगा।