चंद्रहास वैष्णव 
विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा अपनी अनूठी परंपराओं, आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। इस पर्व की सबसे खास रस्म रथ परिक्रमा है, जिसमें स्थानीय ग्रामीण और आदिवासी पूरे उत्साह एवं आस्था के साथ विशालकाय रथ को खींचते हैं। लेकिन इस बार रथ परिक्रमा के दौरान हुई एक अप्रिय घटना ने सभी को चौंका दिया। ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों के बीच कथित झड़प के बाद ऐसी स्थिति बनी कि रथ की आखिरी परिक्रमा पूरी कराने के लिए प्रशासन को पहली बार जेसीबी मशीन की मदद लेनी पड़ी।
##रथ खींचने के दौरान पुलिस और ग्रामीणों में झड़प##
जानकारी के अनुसार, रथ परिक्रमा के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था संभालने के दौरान पुलिसकर्मियों तथा रथ खींचने पहुंचे ग्रामीणों के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मामला कथित तौर पर हाथापाई तथा मारपीट तक पहुंच गया। घटना के बाद मौके पर तनाव की स्थिति निर्मित हो गई, जिसके चलते अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद स्थिति को शांत कराया गया।
##नाराज ग्रामीणों ने रथ खींचने से किया इनकार##
पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुए विवाद से नाराज ग्रामीणों ने रथ खींचने से इनकार कर दिया। बस्तर दशहरा की रथ परिक्रमा में ग्रामीणों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उनके पीछे हटने से रथ परिक्रमा पूरी कराने को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई। परिक्रमा में हो रही देरी के बीच प्रशासन के सामने निर्धारित रस्म को पूरा कराने की चुनौती खड़ी हो गई।
##परंपरा निभाने के लिए जेसीबी का लिया गया सहारा##
रथ परिक्रमा में आई बाधा और समय पर रस्म पूरी कराने की मजबूरी के बीच प्रशासन ने अंततः जेसीबी मशीन की मदद से रथ को खिंचवाया। बस्तर दशहरा जैसे ऐतिहासिक और आस्था से जुड़े पर्व में रथ खींचने की परंपरा स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय की सहभागिता से निभाई जाती है। ऐसे में जेसीबी से रथ खिंचवाने की घटना चर्चा का विषय बन गई है।
##भीड़ प्रबंधन और आपसी समन्वय पर उठे सवाल##
बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और आदिवासी परंपराओं का प्रतीक है। रथ परिक्रमा में ग्रामीणों की भागीदारी इस पर्व की विशिष्टता है। ऐसे में पुलिस और ग्रामीणों के बीच विवाद के बाद उत्पन्न स्थिति ने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आपसी समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह घटना इस बात की ओर भी इशारा करती है कि ऐसे बड़े आयोजनों में पुलिस प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच संवाद, संयम और आपसी सहयोग कितना आवश्यक है। अब सवाल यह है कि आखिर विवाद की नौबत क्यों आई और क्या बेहतर समन्वय से इस स्थिति को टाला जा सकता था? बस्तर दशहरा की परंपराओं की गरिमा बनाए रखने के लिए ऐसी घटनाओं से सबक लेना जरूरी है।
