*नियमों की धज्जियां उड़ाकर टुकड़ों में लाखों के पेमेंट; आरटीआई में खुद ने माना: 2023 का टेंडर, 2026 तक अंधाधुंध भुगतान*

विनोद जैन

बालोद, 28 सितंबर। बालोद नगरपालिका परिषद में कानून, वित्तीय संहिता और सरकारी नियमों की खुली अर्थी निकाली जा रही है। जहां एक आम नागरिक को एक छोटे से प्रमाण पत्र के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, वहीं दूसरी तरफ एक चहेती फर्म पर पालिका के मेहरबान अफसर और बाबू बिना किसी नियम-कायदे के सरकारी खजाने की मलाई लुटा रहे हैं। इस पूरे महा-घोटाले की कलई खुद नगर पालिका द्वारा आरटीआई में दिए गए आधिकारिक दस्तावेजों और शासन के जांच आदेशों ने खोलकर रख दी है।

आरटीआई का सबसे बड़ा खुलासा: 2023 का टेंडर, 2026 तक अंधाधुंध भुगतान;

नगर पालिका के जनसूचना अधिकारी द्वारा आरटीआई के तहत दिए गए जवाब ने यह साबित कर दिया है कि पालिका में सब कुछ आंख मूंदकर चल रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कोई निविदा आमंत्रित नहीं की गई। वर्ष 2023-24 की स्वीकृत दर पर ही पुरानी फर्म आईके इन्टरप्राईजेस बालोद को काम थमाया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में फिर से कोई निविदा जारी नहीं हुई और उसी 2023-24 के टेंडर को ढाल बनाकर उसी फर्म से फ्लैक्स व बैनर छपवाए गए। यानी 3 साल बीत जाने के बाद भी, बिना किसी खुली प्रतिस्पर्धा और बिना किसी नई निविदा के, जनता के गाढ़े पसीने की कमाई को एक ही चहेती फर्म की झोली में डाला जाता रहा।

टुकड़ों में भुगतान का खेल;

सक्षम अधिकारियों की तकनीकी व वित्तीय स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया से बचने के लिए अधिकारियों ने टुकड़ों में बिल पास करने का फॉर्मूला अपनाया। लाखों रुपये के एकमुश्त काम को छोटे-छोटे वाउचर्स में तोड़ा गया। 16 अप्रैल 2025 को 79,698 का बिल पास किया गया। 19 और 20 मार्च 2026 को महज 48 घंटे के भीतर 97,420, 95,464, 32,439 और 46,296 के चार अलग-अलग बिल धड़ाधड़ पास कर दिए गए। बिना किसी वैध वर्क ऑर्डर के धड़ल्ले से ई-पेमेंट के जरिए भुगतान कर दिया गया।

फर्म का खेल: कागजों पर बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन व स्टेशनरी दुकान, काम मिला फ्लैक्स छपाई का;

फर्म आईके इन्टरप्राइजेस के उद्यम रजिस्ट्रेशन को देखें तो उसकी पोल पूरी तरह खुल जाती है। फर्म का मुख्य पंजीकरण ट्रेडिंग (व्यापार) में है। इसका एनआईसी कोड 41001 (भवन निर्माण) और 47613 (स्टेशनरी की खुदरा दुकान) दर्ज है। फर्म के पास फ्लैक्स और डिजिटल प्रिंटिंग का कोई तकनीकी सेटअप या विशिष्ट मैन्युफैक्चरिंग रजिस्ट्रेशन तक नहीं है, फिर भी पालिका ने छपाई की पूरी जागीर इसी फर्म के नाम लिख दी।

मंत्रालय ने दिया आदेश, दुर्ग संयुक्त संचालक ने मांगा जवाब… पर पालिका ने दबा दी फाइल;

जब वार्ड 14 के नागरिक संजीव मणि नायर ने इस खुली लूट की शिकायत मंत्रालय में की, तो हड़कंप मच गया। 22 जून 2026 को नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग मंत्रालय ने पत्र जारी कर जांच के आदेश दिए। 24 जून 2026 को संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग ने पत्र क्रमांक 1684 जारी कर सीएमओ बालोद को 03 दिवस के भीतर विशेष वाहक के हस्ते प्रमाणित दस्तावेज और प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का कड़ा निर्देश दिया। हैरानी की बात है कि 3 दिन की मियाद को गुजरे हुए 3 महीने बीत चुके हैं, लेकिन बालोद पालिका के अधिकारी संयुक्त संचालक और मंत्रालय के आदेश को रद्दी की टोकरी में डालकर बैठ गए हैं। न तो जांच रिपोर्ट भेजी गई और न ही फाइलों को आगे बढ़ने दिया गया।

अब सीधे शासन से आर-पार की तैयारी;

अधिकारियों की इस मिलीभगत के खिलाफ शिकायतकर्ता ने अब सीधे नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव महोदय को स्मरण पत्र भेजकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। मांग की गई है कि नगर पालिका बालोद की वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की छपाई से संबंधित समस्त कैशबुक, लेजर और बिल वाउचर तत्काल जब्त किए जाएं। जांच दबाने और शासन के आदेश की अवहेलना करने वाले सीएमओ और संबंधित लेखापाल को तत्काल निलंबित किया जाए। चहेती फर्म को ब्लैकलिस्ट कर शासकीय धन की रिकवरी की जाए और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।