*वोट चोरी के खिलाफ कांकेर में कांग्रेस का हल्लाबोल, भारी भीड़ के साथ धरना-प्रदर्शन पुतला दहन और रैली जिला कांग्रेस अध्यक्ष बसंत यादव के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल “तीन सदस्यीय आयोग में दो आयुक्तों की 14 आपत्तियां सामान्य बात नहीं, देश को जवाब चाहिए” — राजेश तिवारी*

यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर

कांकेर, 28 सितंबर 2026। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर जिला कांग्रेस कमेटी, उत्तर बस्तर कांकेर ने सोमवार को कथित “वोट चोरी”, मतदाता सूचियों में अनियमितता तथा निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन पुतला दहन एवं रैली आयोजित की। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष बसंत यादव के नेतृत्व में निकली रैली में जिले के ब्लॉक एवं मंडल अध्यक्षों, जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों, वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही। प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए निर्वाचन आयुक्त
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई

भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रीय सदस्य राजेश तिवारी ने धरना-प्रदर्शन को संबोधित करने के साथ प्रेस को संबोधित करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रहे हैं और अब निर्वाचन आयोग के भीतर से सामने आई आपत्तियों की खबरों के बाद इन सवालों की स्वतंत्र जांच और भी आवश्यक हो गई है।

राजेश तिवारी ने कहा, “तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग में यदि दो निर्वाचन आयुक्त अलग-अलग निर्णयों और प्रक्रियाओं पर बार-बार लिखित आपत्ति दर्ज करा रहे हैं, तो इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देश को यह जानने का अधिकार है कि निर्णय किसकी सहमति से लिए गए और दोनों आयुक्तों की आपत्तियों पर क्या कार्रवाई हुई।”

उन्होंने बताया कि हालिया मीडिया जांच में निर्वाचन आयुक्त के 2 सदस्यों की दस महीनों में कम-से-कम 14 मौकों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम जोड़ने-हटाने, मतदाता डेटाबेस और SIR से जुड़े विषय शामिल बताए गए हैं। मौजूदा कानून के अनुसार आयोग का काम जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर होना चाहिए

राजेश तिवारी ने आरोप लगाया कि “यदि दो आयुक्तों को निर्णयों की जानकारी तक नहीं दी गई और उनकी आपत्तियों के बावजूद कदम उठाए गए, तो यह बेहद गंभीर मामला है। इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए कि क्या मुख्य निर्वाचन आयुक्त एकपक्षीय ढंग से निर्णय ले रहे थे और क्या उन पर सत्ता या सरकार का कोई दबाव था।” उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग किसी राजनीतिक दल या सरकार का विभाग नहीं, बल्कि स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसकी निष्पक्षता पर उठे प्रत्येक सवाल का जवाब तथ्यों के साथ देश के सामने आना चाहिए।

बसंत यादव बोले—“एक भी पात्र मतदाता के अधिकार से समझौता स्वीकार नहीं”

जिला कांग्रेस अध्यक्ष बसंत यादव ने कहा कि जिला कांग्रेस कमेटी लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह आंदोलन कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से अनुचित तरीके से हटना उसके लोकतांत्रिक अधिकार को सीधे प्रभावित करता है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने, त्रुटि सुधारने और अपील की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए तथा प्रत्येक पात्र नागरिक को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

बसंत यादव ने कहा कि “आज कांकेर की सड़कों पर उमड़ी भारी संख्या मै कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ यह संदेश दे रही है कि मताधिकार से जुड़े सवालों पर कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। निष्पक्ष चुनाव और शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकता है।”

राष्ट्रपति के नाम
ज्ञापन में रखीं प्रमुख मांगें

जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग, कथित “वोट चोरी”, मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष, समयबद्ध एवं पारदर्शी जांच, ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवादित निर्णयों एवं आयोग की संबंधित कार्यप्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा तथा जांच में आपराधिक कृत्य या कानून का उल्लंघन प्रमाणित होने पर गिरफ्तारी सहित कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।

इसके साथ ही SIR के अंतर्गत नाम हटाने और नए नाम जोड़ने की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, प्रत्येक पात्र मतदाता को अपना पक्ष रखने, त्रुटि सुधारने एवं अपील करने का पर्याप्त अवसर तथा निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता, स्वायत्तता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक संवैधानिक एवं विधिसम्मत कदम उठाने की मांग भी ज्ञापन में की गई है।

“चुनाव आयोग जवाब दे, राजनीतिक दल नहीं” — तिवारी

राजेश तिवारी ने कहा कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने पर उनका तथ्यात्मक जवाब स्वयं आयोग की ओर से आना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग से पूछे गए सवालों पर सत्तारूढ़ दल के नेताओं द्वारा जवाब दिया जाना संदेह को और बढ़ाता है। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में चुनाव आयोग की निष्पक्षता केवल दिखाई ही नहीं देनी चाहिए, बल्कि उसके प्रत्येक निर्णय में पारदर्शिता और संस्थागत प्रक्रिया भी स्पष्ट होनी चाहिए।”
कांग्रेस ने इसी दावे और सामने आई लिखित आपत्तियों के बीच स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्वतंत्र जांच की मांग की है।

धरना-प्रदर्शन और रैली के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा, गिरफ्तारी, वोट चोर गद्दी छोड़ के नारे के साथ रैली निकाली ,मताधिकार की रक्षा, मतदाता सूची में पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही की मांग बुलंद की।

जिला कांग्रेस कमेटी ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा के लिए पार्टी संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाती रहेगी।
आज के इस कार्यक्रम मै पूर्व विधायक श्री शंकर ध्रुवा, प्रदेश सचिव जनक नन्दन कश्यप, आदिवासी कांग्रेस सरजू शोरी, नवली मीना मांडवी, रूप सिंह पोटाई,नरेंद्र यादव, सुभद्रा सलाम, गोमती सलाम, हेमंत ध्रुव, सहित प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी,जिला के समस्त ब्लॉक ,मंडल के अध्यक्ष गण जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी,अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे