समस्याओं का इलाज बिरले लोगों को ही आता है : श्री अक्षयमुनिजी मसा

विनोद जैन

बालोद, 31 अगस्त 2026।
समता भवन बालोद में चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला के दौरान शासन दीपक श्री अक्षयमुनिजी मसा ने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में छोटी-बड़ी समस्याएं आती हैं, लेकिन उनका समाधान बाहर नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर तलाशना चाहिए। समस्याएं इंद्रधनुष की तरह हैं, जो दूर से दिखाई देती हैं, लेकिन पास जाने पर अपना स्वरूप बदल लेती हैं।

उन्होंने कहा कि आज मनुष्य छोटी-सी पीड़ा को भी सहानुभूति के सहारे बढ़ा-चढ़ाकर बताता है। सहानुभूति पीड़ा को कम करती है, लेकिन अध्यात्म में सिंपैथी नहीं, इम्पैथी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन सुबह उठकर यह संकल्प करें कि आज मैं क्या अच्छा कर सकता हूं। यही जीवन को बेहतर बनाने का मार्ग है।

श्री अक्षयमुनिजी मसा ने कहा कि जहां प्राणियों की हत्या होती है, वहां प्रकृति का प्रकोप निश्चित रूप से देखने को मिलता है। बुजुर्गों का अनुभव जीवन को दिशा देता है, जबकि युवाओं का जोश और होश समाज को आगे बढ़ाता है। उन्होंने महिलाओं को वीरांगना बताते हुए कहा कि नारी शक्ति महान शक्ति है और परिवार व समाज की सुरक्षा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि वाणी ही इंसान की चमक है, इसलिए बोलने से पहले विचार करना चाहिए। साथ ही जीवन में उतना ही वादा और कमिटमेंट करें, जितना निभा सकें।

तपस्या की बहार

जैन मुनि की प्रेरणा से बालोद में तपस्या का क्रम जारी है। अब तक चार साधकों ने मासक्षमण (30 दिन का उपवास) पूर्ण किया है। इसी क्रम में नमिता नाहटा ने 29, ईषा नेहा तातेड़ ने 28 तथा कुसुम सौरभ नाहटा ने 16 उपवास की तपस्या का संकल्प ग्रहण किया।