विनोद जैन
बालोद – केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने भारत के पुराने रेलवे स्टेशनो का कायाकल्प कर सर्वसुविधायुक्त बनाने हेतु अनेक स्टेशनो को अमृत भारत स्टेशन के तहत करोडो रूपये की राशि जारी की जहाँ सर्वोत्तम सुविधा रेलवे के यात्रियों को मिले और उन्हें किसी भी तकलीफ का सामना ना करना पड़े इसी तारतम्य मे बालोद स्टेशन को भी अमृत भारत स्टेशन की श्रेणी मे लेकर लगभग 6 करोड़ की राशि जारी की
स्टेशन को बहुत ही खूबसूरत बनाया गया लोग दूर दूर से स्टेशन को देखने भी आने लगे शहर के लोग यहाँ की खूबसूरती का आनंद लेने एवं स्टेशन के बाहर सड़को पर पैदल घूमने आने लगे नवनिर्मित चौड़ी सड़क और सड़को मे लगे स्ट्रीट लाइट के कारण लोगो को रात्रि मे इन सड़को पर घूमने का एक स्वच्छ एवं प्रकाशमय वातावरण वाला स्थान मिला लेकिन यह सिर्फ चार दिन की चांदनी फिर अँधेरी रात वाली कहावत साबित हो गयी
यहाँ पैदल घूमने आने वाले लोगो ने बताया की लगभग 20 दिनों से नये लगे स्ट्रीट लाइट मे से कुछ लाइट बंद हैं रात्रि मे ट्रेन के आने के बाद यात्रियों को भी अंधेरे मे जाने मजबूर होना पड़ता हैँ वहीं स्टेशन के बाहर बने गार्डन मे बालोद के तांदुला डेम का एक छोटा सा कृतिम छलकने वाला डेम रूपी फ़ौव्वारा बनाया गया हैँ जो की लोकार्पण के बाद से ही बंद पड़ा हैँ गार्डन के अंदर लगे महंगे एल ई डी भी कुछ दिन बंद पड़े थे ऐसे मे लोग कहने लगे हैं की चार दिन की चांदनी फिर अँधेरी रात हो गया हैँ इतनी राशि खर्च की गयी पर अभी से बंद लाइट चालु नहीं हो पाए हैं यह लाइट किस कारण से बंद पड़ी हैँ इसका कारण किसी को ज्ञात भी नहीं हो पाया हैँ कोई केबल वायर मे खराबी का हवाला दे रहे हैं कोई पता नहीं जैसा साधारण सा जवाब दे रहे हैं क्यों खराब हैँ इसकी पुष्टि नहीं हो पाई हैँ लोगो का कहना हैँ की ज़ब इसे बंद ही रखना था तो इतनी राशि क्यों खर्च की गयी और क्यों बनाया गया
*पूर्व मे बने बाल उद्यान की भी हो गयी दुर्दशा*
वहीं पूर्व मे रेलवे कालोनी मे एक बाल उद्यान भी बनाया गया था जो देख रेख के अभाव मे जंगलो मे तब्दील हो गया हैँ उस उद्यान मे बच्चो को पालक भेजनें से डरते हैं की कोई जीव जंतु उन्हें नुकसान ना पहुंचा दे
*पुरुष और महिला प्रसाधन मे लटका रहता हैँ ताला*
स्टेशन के दोनों तरफ पुरुष एवं महिला प्रसाधन बना हुआ हैँ जहाँ एक ओर इस प्रसाधन मे ताला लटका रहता हैँ और दूसरी तरफ के प्रसाधन मे गंदगी के कारण लोग जाने से कतराने लगे हैं इस व्यवस्था को लेकर भी लोगो मे जमकर नाराजगी देखि जा रही हैँ
*पंखे के तो लगे हैं पर चेयर मे बैठने से नहीं आती यात्रियों को हवा*
बालोद रेलवे स्टेशन के अंदर प्लेट फ़ार्म मे नई सुविधा का विस्तार करते हुए टीन शेड का निर्माण भी हुआ हैँ यहाँ यात्रियों के लिए बाकायदा पंखा भी लगाया गया हैँ पर पंखे के निचे बैठने की कुर्सी नहीं लगाकर कुर्सीयो को दूर रखा गया हैँ जिससे यात्रियों को गर्मी और टीन शेड का तपिश झेलने मजबूर होना पड़ता हैँ रात्रि मे ट्रेन के इन्तजार मे बैठने वाले यात्रियों को मच्छरो के कारण इधर उधर घूमने मजबूर होना पड़ता हैँ
