दूध-दही के नाम पर क्या परोसा जा रहा है? जगदलपुर की डेयरी पर पुराने आरोप फिर चर्चा में, खाद्य विभाग की कार्रवाई भी सामने

चंद्रहास वैष्णव

जगदलपुर। शहर और आसपास के इलाकों में दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। बोरपदर क्षेत्र में संचालित बस्तर डेयरी फार्म को लेकर पिछले कई वर्षों से स्थानीय लोगों की शिकायतें सामने आती रही हैं। वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट में स्थानीय रहवासियों ने डेयरी से निकलने वाली बदबू और वेस्ट मटेरियल के साथ दूध की पैकेजिंग प्रक्रिया में कथित रूप से केमिकल के इस्तेमाल की शिकायत की थी। रहवासियों ने आरोप लगाया था कि फैक्ट्री से निकलने वाले अपशिष्ट के कारण आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है।

इसके बाद वर्ष 2023 में बस्तर डेयरी फार्म के दूध की गुणवत्ता को लेकर शिकायत के आधार पर खाद्य विभाग ने सैंपल लेकर जांच कराई थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अपर कलेक्टर की न्यायालयीन कार्रवाई में दूध को मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने के मामले में बस्तर डेयरी फार्म पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। रिपोर्ट में शिकायत दूध में फैट की मात्रा निर्धारित मानक से अधिक होने को लेकर बताई गई थी।

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क पोर्टल पर उपलब्ध आदेश के अनुसार, बस्तर डेयरी फार्म प्राइवेट लिमिटेड, ग्राम बोरपदर के खिलाफ दूध से जुड़े खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग और लेबलिंग में खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का प्रकरण सामने आया था। इस मामले में न्याय निर्णायक अधिकारी द्वारा 60 हजार रुपये की शास्ति अधिरोपित किए जाने का उल्लेख है।

वहीं अगस्त 2026 में प्रदेश में डेयरी एनालॉग उत्पादों पर कार्रवाई के बीच बस्तर में भी खाद्य सुरक्षा विभाग ने होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य प्रतिष्ठानों में जांच अभियान चलाया। विभाग की निगरानी उन उत्पादों पर भी रही जिनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा या अन्य गैर-दुग्ध तत्वों के इस्तेमाल की आशंका थी।

ऐसे में अब सवाल यह है कि जगदलपुर के उपभोक्ताओं को मिलने वाले दूध, दही, पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों की वास्तविक गुणवत्ता क्या है? यदि किसी उत्पाद में खाद्य मानकों के विपरीत सामग्री या रसायन का इस्तेमाल हो रहा है तो इसकी पुष्टि केवल वैज्ञानिक जांच और अधिकृत लैब रिपोर्ट से ही हो सकती है।

स्थानीय स्तर पर उठ रही शिकायतों और पूर्व में हुई कार्रवाई को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन से मांग की जा रही है कि डेयरी के दूध, दही, पनीर सहित सभी प्रमुख उत्पादों के सैंपल लेकर स्वतंत्र प्रयोगशाला में जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही उत्पादन प्रक्रिया, कच्चे माल, पैकेजिंग, लाइसेंस और अपशिष्ट प्रबंधन की भी जांच हो, ताकि उपभोक्ताओं के सामने पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके।

फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड यह जरूर दिखाता है कि इस डेयरी से जुड़े खाद्य गुणवत्ता और नियामकीय अनुपालन के मामले में पूर्व में शिकायतें तथा दंडात्मक कार्रवाई हो चुकी है; लेकिन वर्तमान में उत्पादों में “जहर” या हानिकारक केमिकल होने का निष्कर्ष वैज्ञानिक जांच के बिना नहीं निकाला जा सकता।