विनोद जैन 
बालोद, 22 सितंबर। नगर पालिका परिषद बालोद में विकास के नाम पर सरकारी खजाने को दोनों हाथों से लूटने का ऐसा घिनौना और शर्मनाक खेल सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की साख पर कालिख पोत दी है। फाइलों में अस्पताल का अति-संवेदनशील किडनी हेमोडायलिसिस आरओ प्लांट और 150 लीटर का सोलर वाटर कूलर दिखाकर धरातल पर कबाड़ थमा दिया गया। चहेती फर्म मेसर्स आयरा एंटरप्राइजेज और पालिका के अफसरों के गठजोड़ द्वारा किए गए इस संगठित फर्जीवाड़े के खिलाफ नगर पालिका के सभापति गोकुल ठाकुर, पार्षद दीपक लोढा एवं एल्डरमैन नितेश वर्मा ने मोर्चा खोला है। तीनों जनप्रतिनिधियों ने पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्यों और मौके की तस्वीरों के साथ कलेक्टर बालोद को लिखित शिकायत सौंपकर फर्म को पूरे जिले में ब्लैकलिस्ट करने, अवैध भुगतान की वसूली और सभी संलिप्तों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
डायलिसिस प्लांट के नाम पर 10 लीटर का डिब्बा:
अस्पताल में गंभीर मरीजों के इलाज हेतु 125 एलपीएच क्षमता वाले जिस विशिष्ट हेमोडायलिसिस आरओ प्लांट का ऑर्डर 40 हजार प्रति नग की दर से दिया गया था, डिब्बा खुलने पर वहां से निकला रसोई में टंगने वाला मात्र 10 लीटर का साधारण ब्राइट एक्वा घरेलू फिल्टर। बाजार में 4,500 से 5,000 रुपये में मिलने वाले इस लोकल प्यूरीफायर को अस्पताल की हाई-टेक मशीन बताकर पालिका ने 2 लाख 40 हजार का सीधा गबन कर दिया।
एमआरपी 49,800 लेकिन पालिका ने चुकाए 80,000:
टेंडर था 150 एलपीएच क्षमता वाले भारी-भरकम सोलर वाटर कूलर का, लेकिन फर्म ने पकड़ा दिया 60 एलपीएच क्षमता वाला साधारण बिजली का कूलर (मॉडल: एसपी 6080 आईएसआई)। बेशर्मी की हद यह रही कि जिस डिब्बे पर निर्माता कंपनी की मूल एमआरपी 49,800 चीख-चीख कर दिख रही थी, उसे पालिका ने 80,000 प्रति नग के भाव से पास कर दिया। 6 कूलरों में सीधे जनता के खून-पसीने के लाखों रुपये डकार लिए गए।
48 घंटे का सुपरफास्ट भ्रष्टाचार:
27 मई 2025 को जेम पर ऑर्डर जारी हुआ, 28 मई को इनवॉइस कटी और 29 मई को बिना किसी स्वतंत्र तकनीकी जांच, लैब टेस्टिंग या भौतिक इंस्टॉलेशन के बिल पास कर दिया गया।
स्टॉक पंजी के पेज 64 पर लीपापोती:
अस्पताल की मेडिकल मशीन हो या चौक-चौराहों का वाटर कूलर—अफसरों ने कागजी खानापूर्ति के लिए दोनों अलग-अलग प्रकृति के सामानों का इंद्राज स्टॉक पंजी के एक ही रहस्यमयी पन्ने (पेज क्र. 64) पर चढ़ाकर फाइल बंद कर दी।
जिलेभर में फैला है आयरा एंटरप्राइजेज का जाल:
शिकायत में इस बात की भी प्रबल आशंका जताई गई है कि मेसर्स आयरा एंटरप्राइजेज ने केवल नगर पालिका बालोद ही नहीं, बल्कि जिले के स्वास्थ्य विभाग, जनपद पंचायतों, शिक्षा विभाग और पीडब्ल्यूडी में भी इसी तरह अमानक और कम क्षमता की सामग्रियां खपाकर करोड़ों की अवैध बिलिंग की है।
कलेक्टर से सीधी मांग, जिलेभर में हो ब्लैकलिस्ट:
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी बालोद से सख्त व दंडात्मक कदम उठाने की मांग की गई है। मेसर्स आयरा एंटरप्राइजेज को नगर पालिका बालोद समेत पूरे जिले के सभी सरकारी विभागों, पंचायतों व निकायों में आजीवन काली सूची में डाला जाए।
जेम पोर्टल से डिबारमेंट, विगत 3 वर्षों का स्पेशल ऑडिट:
भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय को पत्राचार कर फर्म को जेम पोर्टल से स्थायी रूप से डी-रजिस्टर कराया जाए। फर्म द्वारा जिले के अन्य विभागों में की गई सभी सप्लायों की निष्पक्ष संयुक्त जांच दल से पड़ताल कराई जाए।
उच्च स्तरीय शिकायत, ब्याज सहित रिकवरी की मांग:
डकारे गए एक-एक पैसे को भू-राजस्व बकाया की तरह संबंधितों से ब्याज सहित वसूल कर फर्म के खातों को तत्काल फ्रीज किया जाए। शिकायत की प्रतियां मंत्रालय, संभागीय आयुक्त दुर्ग, संचालक नगरीय प्रशासन, एंटी करप्शन ब्यूरो, और महालेखाकार को भी प्रेषित कर दी गई हैं। अब देखना यह है कि सरकारी खजाने में सेंध लगाने वाले सरकारी सेवक और उनके चहेते ठेकेदार पर प्रशासन कब शिकंजा कसता है या फिर यह फाइल भी जांच के नाम पर दबाने की कोशिश होगी।
