बदजुबानी से खुली BDF फ्रेंचाइजी की पोल, बिना रजिस्ट्रेशन दुकान संचालन का खुलासा; बोरपादर प्रदूषण पर 8 साल से सवाल

चंद्रहास वैष्णव

बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में खाद्य पदार्थों की बिक्री से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने उपभोक्ता अधिकारों से लेकर खाद्य सुरक्षा और औद्योगिक प्रदूषण तक कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धर्मपुरा स्थित BDF की फ्रेंचाइजी दुकान में ग्राहक के साथ विवाद और कथित अभद्र व्यवहार के बाद जब उपभोक्ता अविनाश सिंह गौतम ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में शिकायत की, तो जांच के दौरान दुकान के रजिस्ट्रेशन को लेकर भी गंभीर स्थिति सामने आई।

शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी से हुई जानकारी के अनुसार, धर्मपुरा स्थित उक्त दुकान का रजिस्ट्रेशन आवेदन पहले ही विभाग द्वारा निरस्त किया जा चुका था। इसके बावजूद दुकान के संचालन को लेकर विभाग ने कार्रवाई शुरू की। विभाग द्वारा खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जाने की जानकारी सामने आई है। साथ ही संचालक को नोटिस दिए जाने और दुकान को बंद कराने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात भी सामने आई है।

मामला यहीं खत्म नहीं होता। शिकायत के बाद BDF संस्थान की ओर से धर्मपुरा स्थित फ्रेंचाइजी दुकान के एक पार्टनर को हटाने का फैसला लिया गया और संबंधित पार्टनर को हटा भी दिया गया। हालांकि पार्टनर को हटाने के पीछे संस्थान की ओर से आधिकारिक रूप से क्या कारण बताया गया, यह स्पष्ट होना बाकी है। लेकिन इस कार्रवाई के बाद फ्रेंचाइजी के संचालन, ग्राहकों के साथ व्यवहार और संस्थान की जवाबदेही को लेकर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं।

उपभोक्ता का आरोप है कि लंबे समय से बिक्री बढ़ने और खाद्य पदार्थों की मांग अधिक होने के चलते फ्रेंचाइजी संचालकों के रवैये में बदलाव आया और ग्राहकों के साथ व्यवहार में भी इसका असर दिखाई देने लगा। एक दुकानदार और ग्राहक के बीच संबंध केवल सामान खरीदने-बेचने तक सीमित नहीं होते, बल्कि उसमें विश्वास और सम्मान भी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में ग्राहक की शिकायत के बाद फ्रेंचाइजी पार्टनर को हटाया जाना कई सवालों को जन्म देता है।

##धरमपुरा से सवाल बोरपदर तक##
BDF से जुड़ा विवाद केवल धर्मपुरा की फ्रेंचाइजी तक सीमित नहीं है। जगदलपुर के नजदीक बोरपादर स्थित BDF की फैक्ट्री को लेकर भी स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से शिकायतें करते रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाला बदबूदार और कथित रूप से रासायनिक युक्त पानी आसपास के क्षेत्र में बहाया जा रहा है, जिससे खेती की जमीन प्रभावित हो रही है और भूजल की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब 8 वर्षों से वे प्रदूषण की समस्या को लेकर संबंधित विभागों और प्रशासन से शिकायत करते आ रहे हैं। अब सवाल यह है कि यदि ग्रामीणों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं तो इस अवधि में संबंधित विभागों द्वारा क्या जांच की गई और क्या कार्रवाई हुई?

धर्मपुरा की फ्रेंचाइजी में रजिस्ट्रेशन को लेकर सामने आई कार्रवाई और बोरपादर फैक्ट्री से जुड़े ग्रामीणों के पुराने आरोपों ने BDF की कार्यप्रणाली और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि विभागीय नोटिस और सैंपलिंग की कार्रवाई आगे किस दिशा में जाती है और बोरपादर में प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों की शिकायतों पर प्रशासन कोई ठोस जांच कराता है या नहीं।

फिलहाल मामला सिर्फ एक ग्राहक और दुकानदार के विवाद का नहीं रह गया है। सवाल खाद्य सुरक्षा, उपभोक्ता के सम्मान, फ्रेंचाइजी संचालन की वैधता और वर्षों से चली आ रही प्रदूषण संबंधी शिकायतों की जांच का है।