चंद्रहास वैष्णव 
शहर में अपराध को लेकर एक बार फिर पुलिसिंग पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रविवार को बस स्टैंड रोड स्थित शराब दुकान के बाजू में दो व्यक्तियों के बीच हुए विवाद ने देखते ही देखते खूनी रूप ले लिया। धारदार हथियार से किए गए हमले में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामला बोधघाट थाना क्षेत्र का है।
यह घटना सिर्फ एक हत्या की वारदात नहीं, बल्कि शहर की कानून-व्यवस्था और पुलिस की अपराध रोकथाम व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। खासकर तब, जब शहर के व्यस्त इलाकों में शराब दुकानों और नशे से जुड़े विवादों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
##रील और रियल पुलिसिंग के बीच कितना अंतर?##
पुलिस की ओर से समय-समय पर जागरूकता अभियान, पेट्रोलिंग और कार्रवाई को लेकर तस्वीरें और वीडियो सामने आते हैं। बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में टीमों की गतिविधियां भी दिखाई देती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली पुलिसिंग का असर शहर की सड़कों पर भी उतना ही दिखाई दे रहा है?
हाल के दिनों में जगदलपुर में चाकूबाजी, जुआ और नशे से जुड़ी घटनाओं की खबरें सामने आई हैं। सितंबर में बोधघाट पुलिस और ब्लैक पैंथर टीम की कार्रवाई में जुआ खेल रहे लोगों की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई थी। वहीं सार्वजनिक स्थान पर चाकू लहराने की घटना में भी पुलिस कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी।
##ब्लैक पैंथर टीम पर भी सवाल##
अपराध नियंत्रण के लिए बनाई गई ब्लैक पैंथर टीम को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं। टीम द्वारा नशे, जुआ और अन्य मामलों में कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं, लेकिन शहर के बीचोंबीच होने वाली हिंसक घटनाओं को रोकने में इस तरह की पेट्रोलिंग व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह रविवार की घटना के बाद चर्चा का विषय बन गया है।
सवाल यह भी है कि अगर शहर के संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की लगातार मौजूदगी है, तो फिर हथियार लेकर विवाद इतना बढ़ कैसे गया कि एक व्यक्ति की जान चली गई?
##शराब दुकानों की लोकेशन पर कब होगा फैसला?##
जगदलपुर में चांदनी चौक और बस स्टैंड क्षेत्र की शराब दुकानों को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे स्थानों पर शराब की बिक्री और उसके आसपास होने वाली गतिविधियों को लेकर प्रशासन और पुलिस से कई बार सवाल किए गए हैं।
अब सवाल यह है कि आखिर इन दुकानों की लोकेशन और इनके आसपास की कानून-व्यवस्था को लेकर ठोस कदम कब उठाया जाएगा?
पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ घटना के बाद आरोपी तक पहुंचने की नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को घटना से पहले रोकने की है। गिरफ्तारी और कार्रवाई अपनी जगह जरूरी है, लेकिन आम नागरिक के लिए असली पुलिसिंग वही होगी, जब शहर की सड़क पर अपराधी हथियार निकालने से पहले कई बार सोचें।
रविवार की वारदात ने इसी सवाल को फिर सामने ला दिया है—जगदलपुर में पुलिसिंग अपराध रोकने पर ज्यादा केंद्रित है या अपराध होने के बाद कार्रवाई दिखाने पर?
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोपी के संबंध में सामने आ रही जानकारी की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की ओर से किया जाना बाकी है।
