खराब पनीर लौटाने पहुंचे ग्राहक से बदसलूकी का आरोप, BDF संचालक ने आरोपों से दी अलग सफाई

चंद्रहास वैष्णव

“ग्राहक बोला- पनीर से आ रही थी बदबू, संचालक का दावा- बिना वजह वापस किया जा रहा था पनीर; संभाग मुख्यालय में मोबाइल जांच यूनिट नहीं होने से खाद्य जांच व्यवस्था पर भी सवाल”

धरमपुरा स्थित BDF मिल्क पार्लर में पनीर को लेकर ग्राहक और रिटेलर के बीच विवाद का मामला सामने आया है। ग्राहक ने आरोप लगाया है कि प्रतिष्ठान से खरीदा गया पनीर खराब था और उसमें से बदबू आ रही थी। शिकायत लेकर जब वह पनीर वापस करने और राशि लौटाने पहुंचा तो कथित रूप से उसके साथ बदसलूकी की गई। ग्राहक का दावा है कि रिटेलर ने साफ तौर पर कहा कि “न पैसा वापस करूंगा और न पनीर वापस लूंगा।”

हालांकि, इस मामले में BDF संस्थान के मालिक ने ग्राहक के आरोपों से अलग पक्ष रखा है। मालिक के अनुसार उपभोक्ता ने सुबह करीब 10 बजे लूज पनीर खरीदा था और दोपहर करीब 3 बजे उसे वापस करने पहुंचा। संचालक का कहना है कि ग्राहक द्वारा उस समय यह कहा गया कि अब उसे पनीर नहीं चाहिए। इस आधार पर रिटेलर ने पनीर वापस लेने से मना किया।

वहीं, ग्राहक का कहना है कि वह महज पनीर वापस करने नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता को लेकर शिकायत करने पहुंचा था। ग्राहक के अनुसार पनीर में कुछ ही देर बाद बदबू आने लगी थी, जिसके चलते उसने रिटेलर से पनीर वापस लेने और राशि लौटाने की मांग की। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ।

“जांच टीम पहुंची, लेकिन सैंपल जांच पर अड़चन”
मामले की शिकायत के बाद संबंधित खाद्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि, ग्राहक के अनुसार पनीर की जांच मौके पर नहीं हो सकी। बताया गया कि खाद्य पदार्थ की जांच के लिए कम से कम आधा किलो नमूना आवश्यक होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि कोई उपभोक्ता कम मात्रा में खाद्य सामग्री खरीदता है और वही सामग्री खराब निकलने का दावा करता है, तो उसकी गुणवत्ता की जांच किस प्रक्रिया से होगी?

“संभाग मुख्यालय में मोबाइल फूड टेस्टिंग यूनिट नहीं”
मामले को लेकर जब खाद्य सुरक्षा अधिकारी से बातचीत की गई तो एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। अधिकारी के अनुसार बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में खाद्य सामग्रियों की जांच के लिए मोबाइल फूड टेस्टिंग यूनिट उपलब्ध नहीं है। खाद्य पदार्थ के नमूने की जांच के लिए उसे राजधानी रायपुर भेजे जाने की स्थिति बन सकती है।

यहीं से खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा होता है। अगर किसी उपभोक्ता को किसी खाद्य पदार्थ के खराब या मानकों के अनुरूप नहीं होने की शिकायत करनी हो और उसका सैंपल जांच के लिए रायपुर भेजना पड़े, तो रिपोर्ट आने में कई दिन लग सकते हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि रिपोर्ट आने तक संदिग्ध खाद्य सामग्री का क्या होगा? क्या उसे बाजार से तत्काल हटाने या सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था है?

“उपभोक्ता अधिकारों के साथ जांच व्यवस्था भी सवालों के घेरे में”

इस पूरे मामले ने एक तरफ खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ता के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े किए हैं, तो दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर खाद्य पदार्थों की त्वरित जांच की व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
ग्राहक की मांग है कि उसके द्वारा खरीदे गए पनीर की गुणवत्ता की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराई जाए तथा यदि पनीर खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

वहीं BDF संचालक की ओर से ग्राहक द्वारा लगाए गए आरोपों से अलग सफाई दी गई है। ऐसे में फिलहाल पनीर वास्तव में खराब था या नहीं, यह जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि खाद्य विभाग इस मामले में किस तरह सैंपल की जांच कराता है और क्या विभाग के पास ऐसी शिकायतों में तत्काल जांच, नमूना सुरक्षित रखने और संदिग्ध खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने की प्रभावी व्यवस्था है।