चंद्रहास वैष्णव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर बस्तर जिले में आयोजित सेवा संकल्प अभियान के तहत रक्तदान शिविर को लेकर अब आयोजन की प्रकृति पर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी, जिला शाखा बस्तर के सचिव द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में जिला प्रशासन के निर्देश पर विभिन्न विकासखंडों से रक्तदाताओं को जुटाने और शिविर की व्यवस्थाओं के लिए प्रशासनिक अधिकारियों एवं स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारियां तय की गई हैं। दूसरी ओर आयोजन स्थल पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के पोस्टर और बैनर नजर आने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यह आयोजन प्रशासनिक है या राजनीतिक संगठन का?
मामले में जब भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष अभिलाष यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर हर वर्ष भाजयुमो द्वारा रक्तदान का आयोजन कराया जाता है। उनके मुताबिक इस वर्ष भी बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ताओं ने इसमें हिस्सा लिया।
हालांकि, आयोजन स्थल पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कुल 37 लोगों द्वारा रक्तदान किए जाने की बात सामने आई। इनमें कितने लोग भाजयुमो के कार्यकर्ता थे और कितने सामान्य रक्तदाता, इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आया है। ऐसे में भाजयुमो द्वारा आयोजन कराए जाने के दावे और वास्तविक रक्तदाताओं की संख्या को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे अहम सवाल रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव द्वारा जारी उस आधिकारिक आदेश को लेकर है, जिसमें कलेक्टर के निर्देश का हवाला देते हुए विभिन्न विकासखंडों से रक्तदाताओं को जुटाने की जिम्मेदारी एसडीएम, तहसीलदार, जनपद सीईओ और खंड चिकित्सा अधिकारियों को दी गई है। इस आदेश में भारतीय जनता युवा मोर्चा का कहीं कोई उल्लेख नहीं है।
यहीं से सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि यदि सरकारी दस्तावेज में आयोजन की व्यवस्थाओं के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी गई है, तो फिर आयोजन स्थल पर भाजयुमो के पोस्टर-बैनर किस आधार पर लगाए गए?
भाजयुमो जिलाध्यक्ष का कहना है कि यह आयोजन संगठन द्वारा हर वर्ष कराया जाता है, जबकि सरकारी दस्तावेज में संगठन का उल्लेख नहीं है। ऐसे में आम लोगों के सामने यह स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है कि इसे राजनीतिक आयोजन माना जाए या प्रशासनिक आयोजन।
सवाल यह भी है कि यदि किसी कार्यक्रम का आयोजन प्रशासनिक स्तर पर किया जा रहा है और सरकारी अमला उसकी व्यवस्थाओं में लगा है, तो वहां राजनीतिक संगठन की ब्रांडिंग का औचित्य क्या है? वहीं यदि यह वास्तव में भाजयुमो का आयोजन है, तो सरकारी आदेश में संगठन का उल्लेख क्यों नहीं है?
अब चर्चा इस बात की भी है कि क्या प्रदेश के किसी भी हिस्से में प्रशासनिक स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में राजनीतिक संगठन अपनी ब्रांडिंग कर सकते हैं? यदि हां, तो इसके लिए क्या नियम या अनुमति की व्यवस्था है और यदि नहीं, तो इस आयोजन में लगाए गए पोस्टर-बैनर को लेकर प्रशासन का क्या रुख है?
रक्तदान जैसे सामाजिक सरोकार के कार्यक्रम में राजनीतिक संगठन की भागीदारी अपने आप में अलग विषय है, लेकिन सरकारी दस्तावेज और कार्यक्रम स्थल की राजनीतिक ब्रांडिंग के बीच दिखाई दे रहे अंतर ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है।
