विनोद जैन 
बालोद। समता भवन में चल रही चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला के अंतर्गत शासन दीपक श्री अक्षयमुनि जी म.सा. ने कहा कि हर व्यक्ति किसी न किसी समस्या से पीड़ित है और अपनी पीड़ा का हल मनमर्जी से कर रहा है, इसलिए उसे आत्मबोध नहीं हो पा रहा है।
मुनिश्री ने कहा कि बाहरी दुनिया को देखकर आदमी कष्ट पाता है और दुखी होता है। एकाग्रता और ध्यान में जाए बिना पीड़ा का हल नहीं होगा। महावीर की वाणी हजारों वर्ष पुरानी है, हम साधु-संत सिर्फ मध्यस्थता में हैं, उस वाणी को जन समुदाय तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। साधु कभी गुमराह और भ्रमित नहीं करेगा, क्योंकि दुनिया वैसे ही पहले से भ्रमित है। सुविधा से आत्म पीड़ा मिटने वाली नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि आदमी ‘मैं’ को जिंदा रखना चाहता है और इसमें वह दुनिया को मार रहा है। महावीर ने सापेक्षवाद दिया है, जिसका अर्थ है व्यक्ति एक-दूसरे के सहयोगी बनें। हमें सोचना होगा कि कहीं हम समाज में बाधक तो नहीं बन रहे हैं। अहम और वहम की जिंदगी मत पालो, यह संसार की सबसे बड़ी बीमारी है।
मुनिश्री ने कहा कि संसार में सत्य सबसे कीमती है। जितना महान व्यक्ति होगा उतना ही वह सामान्य होगा। आज जीवनशैली खराब होने से अस्पतालों की संख्या निरंतर बढ़ रही है, इसका मतलब है कि बीमार व्यक्ति भी बढ़ रहे हैं। हमें कष्ट मिटाने का उपाय सीखना होगा।
*स्वाध्यायी बंधुओं का सम्मान*
साधुमार्गी जैन संघ छत्तीसगढ़ एवं साधुमार्गी संघ बालोद द्वारा स्वाध्याय सेवा में विभिन्न क्षेत्रों में सेवा देने वाले भाई-बहनों का महावीर भवन में अभिनंदन किया गया।
धर्मसभा में रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी, खरियार रोड, महासमुंद, मानपुर, दल्लीराजहरा, अछोली सहित प्रदेश के विभिन्न अंचलों से सैकड़ों धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। इस दौरान मनीष गोलछा, तिलोकचंद जैन, चंपालाल गुंदेचा, अशोक देशलहरा, अमरचंद जैन, जितेंद्र बाफना, सिद्धि कोटड़िया, राजेश पारख, विनोद पारख सहित कई श्रद्धालुओं ने आगामी चातुर्मास 2027 के लिए श्री अक्षयमुनि जी से विनती रखी।
*तपस्या का क्रम जारी*
जैन संत श्री अक्षयमुनि जी की प्रेरणा से तपस्या का क्रम निरंतर जारी है। आज सोनम श्रीश्रीमाल ने 18, रितु बाफना व लोमिनी नाहटा ने 17, निर्मल नाहटा व निधि कोटड़िया (धमतरी) ने 12, अरुण रायसोनी, संजना चोरड़िया, वर्षा चोरड़िया, अविरल नाहटा, सुकमा बाई (मानपुर) ने 11, हितीक्षा चोपड़ा व शोभना बाफना (अर्जुंदा) ने 10, गिरीश कंवाड़ ने 9 और भाविका रायसोनी ने 7 उपवास तपस्या का संकल्प ग्रहण किया।
