पीएम मोदी के जन्मदिन पर दीपोत्सव: सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल पर भूपेश बघेल ने उठाए सवाल दीये, बाती और तेल का खर्च किस मद से? विधानसभा में पाई-पाई का हिसाब मांगने की तैयारी

चंद्रहास वैष्णव


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17 सितंबर को जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही है। छत्तीसगढ़ में भी ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत व्यापक स्तर पर दीप प्रज्वलन और विभिन्न आयोजन प्रस्तावित हैं।
इस आयोजन को लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की भाजपा सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है।

भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया कि भाजपा को अपने नेता का जन्मदिन राजनीतिक रूप से मनाने का पूरा अधिकार है, लेकिन एक विशुद्ध राजनीतिक दल के आयोजन में सरकारी तंत्र, मशीनरी और जनता के पैसे का दुरुपयोग किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उठाए गए प्रमुख सवाल:

सरकारी कार्यक्रम या पार्टी का आयोजन?

भूपेश बघेल ने सवाल दागा कि मुख्यमंत्री स्तर पर बैठकें होने के बाद यदि विभिन्न विभागों के प्रमुखों, जिला कलेक्टरों और प्रशासनिक मशीनरी से इन आयोजनों की तैयारियां कराई जा रही हैं, तो सरकार यह स्पष्ट करे कि यह कोई शासकीय कार्यक्रम है या किसी राजनीतिक दल का निजी आयोजन?

दीये, बाती और तेल की खरीद किस मद से?

प्रदेश भर में लाखों दीये जलाने की योजनाओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि आयोजन स्थल, दीये, बाती और तेल की खरीद के लिए राशि किस बजट मद से स्वीकृत की गई है? खरीद की प्रक्रिया क्या है और इसका भुगतान किस विभाग के खाते से किया जा रहा है?

जवाबदेही और स्वीकृति का स्तर क्या है?

उन्होंने पूछा कि जनता के टैक्स के पैसे को इस तरह के राजनीतिक आयोजनों में झोंकने की आधिकारिक स्वीकृति किस स्तर से जारी की गई? क्या संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के पास इसके लिए कोई नियम सम्मत वित्तीय प्रावधान है?

विधानसभा में मांगेंगे पाई-पाई का हिसाब:

पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि कांग्रेस इस पूरे खर्च पर पैनी नजर रख रही है। जनता की गाढ़ी कमाई से होने वाले हर खर्च की जवाबदेही तय की जाएगी और आने वाले विधानसभा सत्र में दीया, बाती, तेल और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर हुए एक-एक रुपये का विधिवत हिसाब मांगा जाएगा।

विपक्ष का रुख बनाम सरकार का दावा
विपक्ष का सीधा आरोप है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन को भुनाने के लिए पूरे प्रशासनिक अमले को पार्टी के काम में झोंक दिया गया है। वहीं, सत्तापक्ष और भाजपा का कहना है कि यह आयोजन जनभागीदारी, स्वच्छता और सेवा संकल्प की गतिविधियों से जुड़ा है।

बहरहाल, भूपेश बघेल के इन तीखे सवालों के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोजन में सरकारी विभागों की वास्तविक भूमिका पर सरकार क्या स्पष्टीकरण देती है और खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाता है या नहीं।