धान उठाव में देरी पर लैम्पस प्रभारियों का फूटा गुस्सा सहकारी बैंक की आमसभा में इस साल खरीदी नहीं करने की चेतावनी; उपाध्यक्ष ने मार्कफेड और प्रशासन की व्यवस्था पर उठाए सवाल

चंद्रहास वैष्णव

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की आमसभा में सुकमा, बीजापुर सहित अंदरूनी क्षेत्रों से पहुंचे लैम्पस प्रभारियों ने पिछले खरीफ सीजन के धान उठाव में हुई देरी को लेकर नाराजगी जताई। प्रभारियों ने आरोप लगाया कि केंद्रों से समय पर धान का उठाव नहीं होने के कारण बड़ी मात्रा में सुखती और खराबी हुई, लेकिन अब इसकी भरपाई का दबाव लैम्पस प्रभारियों पर बनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इस वर्ष धान खरीदी से दूरी बनाने का निर्णय लिया जा सकता है।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के उपाध्यक्ष श्रीनिवास मिश्रा ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन और मार्कफेड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनके अनुसार बीजापुर और सुकमा जैसे क्षेत्रों में 25 मई तक केंद्रों से धान का उठाव नहीं हो पाया था। लंबे समय तक खुले में धान पड़े रहने से करीब 2 से 2.5 प्रतिशत तक सुखती आने और बारिश के कारण धान खराब होने की बात कही गई।

आरओ समय पर नहीं कटे, फिर प्रभारियों पर कार्रवाई क्यों?

श्रीनिवास मिश्रा के अनुसार धान का समय पर उठाव कराने के लिए रिलीज ऑर्डर (आरओ) जारी करना और परिवहन की व्यवस्था संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि जब समय पर उठाव नहीं हुआ तो अब लैम्पस प्रभारियों पर एफआईआर और क्षतिपूर्ति का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने वास्तविक सुखती और जानबूझकर की गई गड़बड़ी के बीच अंतर करने की मांग की।

■ जिलों में क्षतिपूर्ति के नियम अलग-अलग होने का आरोप##
उपाध्यक्ष ने बताया कि कोंडागांव में 2 प्रतिशत तक की छूट देकर धान का मिलान कराया गया, जबकि जगदलपुर में 1.5 प्रतिशत की छूट दी गई। उनके मुताबिक यहां कुल शॉर्टेज करीब 1.66 प्रतिशत रहा। दूसरी ओर सुकमा और बीजापुर में अधिकारियों द्वारा पूरी भरपाई का दबाव बनाए जाने की शिकायत सामने आई है। उनका कहना है कि प्राकृतिक रूप से हुई सुखती को लेकर एक समान नीति अपनाई जानी चाहिए।

##दूर के मिलर्स को आवंटन से बढ़ी परिवहन की परेशानी##
मिश्रा ने आरोप लगाया कि स्थानीय मिलर्स को धान आवंटित करने के बजाय धमतरी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के मिलर्स को आरओ जारी किए गए। लंबी दूरी के कारण परिवहन में देरी हुई और इसका असर उठाव व्यवस्था पर पड़ा। उन्होंने कहा कि जहां किसी लैम्पस प्रभारी द्वारा जानबूझकर गड़बड़ी की गई है, वहां कार्रवाई और राशि की वसूली उचित है, लेकिन वास्तविक सुखती अथवा प्रशासनिक देरी का भार प्रभारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए।

आमसभा में लैम्पस प्रभारियों ने इस पूरे मामले में स्पष्ट नीति बनाने, वास्तविक क्षति का आकलन करने और जिम्मेदारी तय करने की मांग रखी। प्रभारियों का कहना है कि समाधान नहीं हुआ तो आगामी धान खरीदी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।