*अवैध प्लाटिंग पर उठे सवाल, प्रदीप चोपड़ा ने मांगी 10-15 वर्षों की निष्पक्ष जांच के विवरण*

विनोद जैन

बालोद :– शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में पिछले कई वर्षों से कथित अवैध प्लाटिंग और उससे जुड़े जमीन कारोबार को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब इस मामले में बालोद प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रदीप चोपड़ा ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने की मांग की है।
प्रदीप चोपड़ा का कहना है कि यदि किसी जमीन पर नियमों के विपरीत प्लाटिंग की गई है, तो ऐसे भूखंडों की रजिस्ट्री किस आधार पर हुई और रजिस्ट्री के बाद संबंधित जमीन पर बैंक ऋण, भवन निर्माण की अनुमति तथा विभिन्न प्रकार के टैक्स की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई—इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर कथित रूप से ऐसी कॉलोनियां भी सामने आती रही हैं, जहां लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई से प्लाट खरीदे हैं। इन क्षेत्रों में सड़क, नाली एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े विकास कार्य होने की स्थिति में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित कार्य किस प्रावधान और अनुमति के तहत किए गए।
*10-15 वर्षों के दस्तावेजों की हो जांच*

प्रदीप चोपड़ा ने मांग की कि पिछले 10 से 15 वर्षों में हुई प्लाटिंग, भूखंडों की रजिस्ट्री, भवन निर्माण अनुमति, बैंक ऋण से संबंधित दस्तावेज तथा विकास कार्यों की नियमानुसार जांच की जाए। उनका कहना है कि जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति को सामने लाना और आम नागरिकों के हितों की रक्षा करना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सभी नियमों का पालन करते हुए जमीन खरीदी या प्लाटिंग की है, उन्हें परेशान नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, जांच में यदि कहीं नियमों की अनदेखी, लापरवाही या जिम्मेदारी में कमी सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों अथवा अधिकारियों की जवाबदेही भी नियमानुसार तय की जानी चाहिए।
*जनता के सवालों का मिले स्पष्ट जवाब*
प्रदीप चोपड़ा ने प्रशासन से मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि कथित अवैध प्लाटिंग वाले क्षेत्रों में रजिस्ट्री किस आधार पर हुई, संबंधित विभागों द्वारा समय रहते क्या कार्रवाई की गई, भवन निर्माण की अनुमति और टैक्स वसूली की प्रक्रिया किस आधार पर हुई तथा यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि जमीन खरीदना आम नागरिक के लिए जीवनभर की जमा पूंजी का निवेश होता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ता है। इसलिए पूरे मामले में निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
प्रदीप चोपड़ा ने प्रशासन से आग्रह किया कि जांच के माध्यम से वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि आम नागरिकों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे और जमीन संबंधी मामलों में उनका भरोसा कायम रहे।
उन्होंने कहा कि यह केवल जमीन और प्लाटिंग का विषय नहीं है, बल्कि आम जनता की मेहनत की कमाई, उसके अधिकार और प्रशासनिक व्यवस्था में उसके विश्वास से जुड़ा जनहित का मुद्दा है।