*संतोष में सुख, जागरूकता में शांति और सदाचार में जीवन की सार्थकता* —- *अक्षयमुनिजी*

विनोद जैन

बालोद के समता भवन में आयोजित चातुर्मास प्रवचन श्रृंखला में शासन दीपक श्री अक्षयमुनिजी मसा ने कहा कि “संतोषी सदा सुखी, चाह गई चिंता मिटी।” *धन और संतोष का कोई सीधा संबंध नहीं है। संसार में धन कमाने के लिए कर्म और पुरुषार्थ आवश्यक हैं, लेकिन अन्याय-अनीति से धन कमाना व्यक्ति को दुख की ओर ले जाता है*।

*उन्होंने कहा कि क्रोध को दबाने या हटाने के बजाय उसके प्रति जागरूक होना सीखना चाहिए।* *संवेदना में जीवन के फूल खिलते हैं, जबकि जड़त्व व्यक्ति को भीतर से कमजोर करता है। नारी को घर की दुर्गा शक्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि नारी घर, परिवार, समाज और देश की शान है, इसलिए उसका सम्मान आवश्यक है।*

*अक्षयमुनिजी ने कहा कि ज्योतिष, मंत्र-तंत्र और बाहरी प्रभाव आध्यात्मिक उन्नति का आधार नहीं हैं। व्यक्ति को अपने विवेक, चेतना और कर्मों को देखना चाहिए।* *मिथ्यात्व से बाहर निकले बिना जीवन की वास्तविकता को समझना कठिन है। आज विश्व अशांति और युद्ध की अंधी दौड़ में है, ऐसे समय में भीतर की हिंसा के प्रति चेतना जगाना आवश्यक है।*

*उन्होंने श्रावक के आदर्श जीवन के लिए संदेश देते हुए कहा कि अच्छे मित्र पर अविश्वास न करें, अन्याय-अनीति से धन न कमाएं, शत्रु के साथ भी निर्दयता न बरतें, परिवार की चुगली से बचें और समता में रहें, क्योंकि समता ही सच्ची विजय का मार्ग है। जीवन में कितने भी कष्ट आएं, आत्महत्या का विचार कभी न करें।*

*उन्होंने कहा कि व्यक्ति को पहचान अपने नाम से नहीं बल्कि अपने कर्मों और गुणों से बनानी चाहिए। अच्छे कर्म और पुण्य का उदय हो तो हर ओर सम्मान और जयकार होती है*।

*जैन संत अक्षय मुनि जी की प्रेरणा से उपवास तपस्या का क्रम निरंतर जारी है श्रीमती इंदिरा देवी बाफना ने आज 16, काजल नाहर ने 15, शर्मिला बाफना ने 14, प्रिया श्रीश्रीमाल,स्नेहल लोढा ने 12 उपवास, नमिता नाहटा ने 9 अंकुश नाहटा, सौम्या, समृद्धि पारख ने 8 तपस्या का प्रत्याख्यान लिया। प्रवचन सभा में आज छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों रायपुर, दुर्ग,नगरी, उदयपुर, उड़ीसा से धर्म प्रेमी बंधु उपस्थित थे । दोपहर में धार्मिक प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया, जिसमें काफी संख्या में भाई ,बहनों, युवाओं ने भाग लिया ।सभा का सफल संचालन ज्ञानचंद चोपड़ा ने किया।*