विनोद जैन 
हर साल की तरह इस बार भी स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह के लिए नगर पालिका अमला अचानक नींद से जागा है और स्टेडियम की साफ़-सफाई में जुट गया है।
लेकिन स्थानीय नागरिकों और खेल प्रेमियों के ज़हन में एक ही बड़ा सवाल कौंध रहा है—क्या 15 अगस्त का जश्न ख़त्म होते ही पालिका प्रशासन फिर से इस स्टेडियम को बदहाली के हवाले कर देगा?
आशंका यूं ही बेबुनियाद नहीं है। नगर पालिका कार्यालय के ठीक सामने स्थित सरदार पटेल मैदान इसका ज़िंदा सबूत है। पालिका की नाक के नीचे यह मैदान अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।
बहुउपयोगी मैदान, फिर भी उपेक्षित, सरदार पटेल मैदान कोई आम मैदान नहीं है। यहां साल भर धार्मिक व सामाजिक आयोजन होते हैं।
आसपास के दो प्रमुख स्कूलों के मासूम बच्चे यहां खेलने आते हैं। इसके बावजूद मैदान में रख-रखाव और सुविधाओं की भारी कमी नगर पालिका के कार्यप्रणाली की पोल खोलती है।
