*नाबालिग की अभिरक्षा तय करने का अधिकार SDM को नहीं -*

विनोद जैन

बालोद – नाबालिग बच्ची की अभिरक्षा से संबंधित मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश बालोद ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बालोद द्वारा पारित पिता की गिरफ्तारी और बच्ची की तलाशी वारंट संबंधित विवादित आदेश को निरस्त कर दिया।

न्यायालय ने माना कि नाबालिग की अभिरक्षा एवं उसके भविष्य और सर्वोत्तम कल्याण से जुड़े प्रश्न का निर्णय विधि के अनुसार सक्षम जिला अथवा कुटुम्ब न्यायालय के समक्ष किया जाना उचित है। नाबालिक के संरक्षण का संक्षिप्त रूप से विचारण करते हुए आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

उक्त न्यायालय ने SDM बालोद कोर्ट से पारित एक विवादित आदेश, के संबंध में कलेक्टर से जांच कराकर 15 दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है। प्रकरण में मालेकर परिवार की ओर से अधिवक्ता भेष कुमार साहू ने प्रभावी एवं विधिक प्रावधानों पर आधारित तर्क प्रस्तुत करते हुए SDM के आदेश की वैधानिकता और क्षेत्राधिकार पर गंभीर प्रश्न उठाए। प्रस्तुत विधिक तर्कों एवं अभिलेखों पर विचार के पश्चात न्यायालय ने विवादित आदेश को निरस्त किया।

जनहित संदेश: “बच्चे की अभिरक्षा माता-पिता के विवाद का विषय नहीं, बल्कि उसके भविष्य और सर्वोत्तम हित का प्रश्न है। ऐसे मामलों में विधि द्वारा निर्धारित सक्षम जिला न्यायालय का मार्ग अपनाना ही उचित है।”