चंद्रहास वैष्णव 
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर पहुंचीं। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित ‘बस्तर पंडुम 2026’ महोत्सव का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम जगदलपुर के लालबाग मैदान में भव्य रूप से आयोजित किया गया, जिसमें जनजातीय संस्कृति की समृद्ध झलक देखने को मिली।
महोत्सव स्थल पर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ने बस्तर पंडुम के अंतर्गत लगाए गए विभिन्न प्रदर्शनी स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने बस्तर की पारंपरिक हस्तशिल्प, जनजातीय कलाओं, लोकवेशभूषा और स्थानीय उत्पादों का अवलोकन किया तथा कलाकारों और शिल्पकारों से संवाद किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति को बस्तर की पारंपरिक स्मृति भेंट कर उनका स्वागत किया।
इसके पश्चात राष्ट्रपति ने मुख्य समारोह में भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई और दीप प्रज्वलन के साथ महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ किया गया। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया, जबकि बस्तर पंडुम पर आधारित एक लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति पर आधारित पारंपरिक आदिवासी नृत्य, लोकगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मनमोहक प्रस्तुतियां देखीं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रपति की उपस्थिति में बस्तर पंडुम का आयोजन बस्तर के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने बताया कि पिछले बस्तर पंडुम में 1885 गांवों में आयोजन हुआ था, जो एक विश्व रिकॉर्ड रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय बस्तर नक्सलवाद के लिए जाना जाता था, लेकिन आज डर की जगह विश्वास ने ले ली है। अब गोलियों की जगह स्कूल की घंटियां सुनाई देती हैं और मुख्यधारा से भटके लोग समाज में लौट रहे हैं। ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ अंचलों में विकास की गति तेज हुई है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मां दंतेश्वरी के जयकारे के साथ अपना संबोधन प्रारंभ किया। उन्होंने कहा कि जब भी वह छत्तीसगढ़ आती हैं, उन्हें अपने घर आने जैसा अनुभव होता है। बस्तर पंडुम में उन्हें देवी-देवताओं के दर्शन, कला-संस्कृति और बस्तर की अनमोल व मधुर सभ्यता को जानने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि बस्तर की सुंदरता यहां की पहचान है, हालांकि नक्सलवाद के कारण लंबे समय तक लोग इससे वंचित रहे।
राष्ट्रपति ने कहा कि ‘नियद नेल्लानार’ जैसी योजनाओं के माध्यम से बस्तर में विकास का सूर्योदय हो रहा है और पानी, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने लोगों से लोकतंत्र पर भरोसा रखने, भटकाने वाली ताकतों से दूर रहने और सरकार की योजनाओं के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने जनजातीय समाज को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि बच्चों का भविष्य ही पूरे भारत का भविष्य है और मां दंतेश्वरी के आशीर्वाद से बस्तर के लोगों व संस्कृति का संरक्षण और उत्थान होगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ उठाने का भी आग्रह किया।

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