चंद्रहास वैष्णव 
बस्तर की जनता से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर की जा रही कथित लूट के विरोध में गुरुवार को बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी (शहर) ने डिमरापाल स्थित सुपर स्पेशलिस्ट कॉन्टिनेंटल अस्पताल के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के उपरांत मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम तथा अस्पताल प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा गया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि बस्तर की जनता को सुविधाओं के नाम पर लूटना कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2019-20 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल परियोजना में 40 प्रतिशत राशि इस शर्त पर दी थी कि बस्तरवासियों को मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर सस्ती और सुलभ चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन वर्तमान में इन शर्तों को दरकिनार किया जा रहा है।
सुशील मौर्य ने कहा कि अस्पताल संचालन के लिए एनएमडीसी स्टील द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 53 करोड़ रुपये प्रदान किए जा रहे हैं। जब जमीन, भवन और उपकरण सभी शासकीय हैं और संचालन हेतु भारी अनुदान दिया जा रहा है, तो फिर 900 रुपये का ओपीडी शुल्क और महंगी जांच दरें वसूलना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने सरकार और अस्पताल प्रबंधन के बीच हुए एमओयू को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि जनता को अपने अधिकारों की जानकारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 23 जनवरी को अस्पताल ने बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के ट्रायल शुरू किया था, उस समय ओपीडी शुल्क 450 रुपये बताया गया था, लेकिन 4 फरवरी को सीजीएचएस दरों का हवाला देकर इसे 900 रुपये कर दिया गया। यह दोहरा रवैया अस्पताल की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सीजीएचएस योजना मुख्यतः केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए है, ऐसे में आम जनता पर इसका हवाला देकर शुल्क थोपना भ्रमित करने वाला कदम है। क्या अस्पताल प्रबंधन हर नागरिक का सीजीएचएस कार्ड बनवाएगा—यदि नहीं, तो इस नाम पर आम जनता को ठगना बंद किया जाए।
कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांग है कि एनएमडीसी से मिल रहे अनुदान को देखते हुए सुपर स्पेशलिस्ट सुविधाएं मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की दरों पर उपलब्ध कराई जाएं। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही शुल्कों में कटौती कर पूर्व समझौतों के अनुरूप सस्ती चिकित्सा सुनिश्चित नहीं की गई, तो पार्टी बस्तर की जनता और आदिवासियों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन और राज्य सरकार की होगी।

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