*मदर मेरी हॉस्पिटल का लाइसेंस हुआ निरस्त,हॉस्पिटल को किया गया सील* *स्वास्थ्य विभाग के नाक के नीचे अवैध नर्सिंगहोम संचालित हो रहा था,विभाग को खबर ही नही* *प्रसूता की मौत के मामले में सीएमएचओ ने गठित की 04 डॉक्टरों सहित 06 लोगो जांच टीम*

यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर

कांकेर। कांकेर सीएमएच्ओ ने 09 जून 2025 को श्रीमति किरण टांडिया पति चंद्रकांत टांडिया ग्राम तालाकुर्रा विकासखण्ड कांकेर जिला कांकेर,की मृत्यु होने के आरोप की जांच उपरान्त प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर नर्सिंग होम एक्ट नियमों का पालन नहीं करने के कारण मदर मैरी हास्पिटल कांकेर को नर्सिंग होम एक्ट छ.ग. राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनायें अनुज्ञापन अधिनियम 2010 की धारा 09 के कंडिका क्रमांक 02 के तहत् मदर मैरी अस्पताल कांकेर का लाईसेन्स तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश पर्यन्त निलंबित करते हुए सभी प्रकार की स्वास्थ्य सेवायें हेतु प्रतिबंधित करने का आदेश दे दिया है,आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व पुलिस प्रशासन की उपस्थिति में मदर मेरी हॉस्पिटल में ताला लगाकर सील करने की कार्यवाही हुई।विदित हो कि जिले के ग्राम तालाकुर्रा निवासी चंद्रकांत टांडिया की पत्नी श्रीमती किरण टांडिया की पीजी कॉलेज के पास स्थित मदर मेरी हॉस्पिटल प्रबंधन पर अपनी पत्नी की मौत के लिये जिम्मेदार ठहराते हुए जिला कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर को शिकायत करते हुए मदर मेरी हॉस्पिटल प्रबंधन,लापरवाह डॉक्टर पर कार्यवाही कर हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्ध करने के आवेदन पर सीएमएचओ ने चार डॉक्टरों सहित 06 लोगो की जांच टीम बनाकर 24 घंटे में जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश जारी कर दिया है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर मालूम हुआ कि विगत 06 वर्षों से मदर मेरी हॉस्पिटल का लाइसेंस ही रिन्युवल नही हुआ था। बगैर लायसेंस के ही शहर के बीच हॉस्पिटल संचालित हो रहा था और स्वास्थ्य विभाग को पता ही नही था,कैसे संभव है?यदि मदर मेरी हॉस्पिटल का लाइसेंस विगत 06 वर्षों से नवीनीकरण ही नही हुआ था तो हॉस्पिटल में स्मार्ट कार्ड(आयुष्यमान कार्ड) से ईलाज कैसे किया जा रहा था,इसकी इजाजत किसने दी थी,ऊपर से भुगतान कैसे किया जा रहा था। प्रसूति कराई जा रही थी,सिजेरियन आपरेशन किया जा रहा था तो निश्चित रूप से जननी सुरक्षा योजना का लाभ भी दिया जा रहा होगा। स्मार्ट कार्ड,आयुष्यमान योजना,जननी सुरक्षा की मॉनिटरिंग करने हेतु पृथक से एक अधिकारी नियुक्त है स्वास्थ्य विभाग में फिर उस अधिकारी को कैसे मालूम नही पड़ा कि मदर मेरी हॉस्पिटल का विगत 06 वर्षों से नवीनीकरण नही हुआ है और यह हॉस्पिटल अवैध रूप से संचालित हो रहा है। कही इन हॉस्पिटल वालो का चारामा के बस स्टैंड के पास सूर्या मल्टीस्पेसिलिटी हॉस्पिटल का हाल भी मदर मेरी हॉस्पिटल जैसा तो नही है। वो तो किरण टांडिया की मदर मेरी हॉस्पिटल में मृत्यु नही होती,कलेक्टर से शिकायत नही होती और सीएमएच्ओ 04 डॉक्टर सहित 06 लोगो की जांच टीम गठित नही करते तो इस अवैध हॉस्पिटल संचालित होने का खुलासा ही नही होता।मदर मेरी हॉस्पिटल में कोई क्वालीफाई डॉक्टर नही,कोई गयनोकोलॉजिस्ट नही,कोई पीडियाट्रिक्स नही,कोई एमडी मेडिसिन डॉक्टर नही,संचालित पैथोलॉजी लेब में कोई पैथोलोजिस्ट नही,ऊपर से बगैर ब्लड बैंक लायसेंस के ब्लड का कारोबार भी मदर मेरी हॉस्पिटल में होता था। इतना सबकुछ बगैर सांठ-गांठ के संभव ही नही,धन्य है कांकेर जिला स्वास्थ्य विभाग का अमला और धन्य है स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी/कर्मचारी।
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