कोतवाली ने किया नाबालिग का नाम सार्वजानिक, बवाल शुरू

चंद्रहास वैष्णव

शहर में बढ़ते आपराधिक गतिविधियां मानो 2025 के आगमन के साथ ही बढ़ते दिखाई देने लगे है।अब तो नाबालिको में भी पुलिस का डर खत्म होते नजर आ रहा है।बीते दिनों शहर के मुख्य चौराहा पर भी चाकू बाजी जैसी गंभीर अपराध होते नजर आया जिसमें संलिप्त अपराधियों को पुलिस ने बड़े बहादुरी से 24 घंटे के भीतर धर दबोचा।
लेकिन यह क्या की पुलिस महकमे के बड़े अधिकारी ने फॉरवर्ड किया प्रेस नोट देखे बिना ही फॉरवर्ड कर दिया जिसमें नाबालिक के नाम सार्वजनिक तौर पर उल्लेखित कर दिया।अब क्या उस बालक का भविष्य तो पुलिस ने ही अंधकार में धकेल दिया।हालांकि मामला ने तुरंत तुल पकड़ लिया और राजधानी के मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया जिसके बाद मानवाधिकार की टीम इस विषय पर संज्ञान ले रही है।

*किशोर न्याय (बालकों की देख रेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74 की परिभाषा*

कोई भी व्यक्ति किसी अपराध से पीड़ित नाबालिग, किसी अपराध के साक्षी नाबालिग, किसी अपराध को करने वाले नाबालिग बच्चे की पहचान को किसी समाचार पत्र, पत्रिका, वीडियो-ऑडियो के माध्यम से उसकी पहचान, चित्र, या उसके स्कूल या निवास का नाम न सार्वजनिक करेगा न ही प्रकट करेगा लेकिन किन्ही परिस्थितियों जाँच करने वाला बोर्ड बच्चे के हित के लिए आवश्यक हो और आज्ञा (अनुमति) देता है तब शर्तो के अनुसार सार्वजनिक किया जा सकता है, अन्यथा नहीं।

दण्ड का प्रावधान:- अधिनियम की धारा 74 की उपधारा 3 के अनुसार कोई व्यक्ति अगर किसी नाबालिग की पहचान सार्वजनिक करता है या धारा जूविनाइल जस्टिस एक्ट 74 (1) का उल्लंघन करता है तब छः माह की कारावास या दो लाख रुपए जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।

विशेष नोट:- धारा 74 की उपधारा (2) के अनुसार पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र के प्रायोजन में बालक के ऐसे अभिलेख का ज़िक्र नहीं करेगी जिस मामले का निपटारा हो गया है एवं अब मामला बंद हो गया है। 【नाबालिग बालक या किशोरी बालक का तात्पर्य 18 वर्ष से कम आयु के लड़का/लड़की दोनो से है।】

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